ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार, पिया आज खिड़की खुली मत छोड़ो आवे झोंके से पगली बयार, पिया आज बाती जली मत छोड़ो ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार दिये की ज्योति अँखियों में लागे, पलकों पे निंदिया सवार पिया आज बाती जली मत छोड़ो ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार पपीहे ने मन की अग्नि बुझा ली, प्यासा रहा मेरा … Continue reading
ज़ुल्म-ओ-सितम को भी, हम तो अदा समझे पर मेरी चाहत को, जाने वो क्या समझे ख़ुद को भला जाना, मुझको बुरा समझे पर मेरी चाहत को, जाने वो क्या समझे लाया था दिल को नज़र करने, क़ुर्बाँ ये जान-ओ-जिगर करने उनके बिना मेरा हाल है क्या, आया था उनको ख़बर करने टाल दिया लेकिन, मुझको … Continue reading
रुलाके गया सपना मेरा, बैठी हूँ कब हो सवेरा रुलाके गया सपना मेरा वही है ग़म-ए-दिल, वही हैं चँदा-तारे हाय, वही हम बेसहारे आधी रात वही है, और हर बात वही है फिर भी न आया लुटेरा रुलाके गया सपना मेरा … कैसी ये ज़िंदगी कि साँसों से हम ऊबे कि दिल डूबा हम डूबे … Continue reading
हमे काले हैं तो क्या हुआ, दिलवाले हैं हम तेरे तेरे तेरे चाहनेवाले हैं हमे काले हैं तो क्या हुआ, दिलवाले हैं ये गोरे गालां तंदाना, ये रेशमी बालां तंदाना ये सोलह सालां तंदाना, हाय तेरे ख़यालां तंदाना हम तेरे तेरे तेरे चाहनेवाले हैं हमे काले हैं तो क्या हुआ, दिलवाले हैं तुम किधर को … Continue reading
दिल का ना करना ऐतबार कोई भूले-से भी ना करना प्यार कोई लाख मनाया दिल ना माना जानके धोखे में आया दीवाना किसका हुआ है दिल-ए-ज़ार कोई दिल का ना करना … क्यूँ कहते हो प्यार किया था कह दो किसीसे दर्द लिया था बदले में ले गया क़रार कोई दिल का ना करना … … Continue reading
चाँद-रात, तुम हो साथ क्या करें, अजी अब तो दिल मचल-मचल गया दिल का ऐतबार क्या क्या करोगे जी, कल जो ये बदल-बदल गया जुल्मी नज़र, कैसी निडर, दिल चुरा लिया जाने किस अजब-से देश में बुला लिया ये भी कोई दिल है क्या जहाँ मौका मिला फिसल-फिसल गया चाँद-रात, तुम हो साथ … सुनिये … Continue reading
मन रे तू ही बता क्या गाऊँ कह दूँ अपने दिल के दुखडे, या आँसू पी जाऊँ मन रे तू ही बता क्या गाऊँ जिसने बरबस बाँध लिया है इस पिंजरे में क़ैद किया है कब तक मैं उस पत्थर-दिल का जी बहलाती जाऊँ मन रे तू ही बता क्या गाऊँ … नींद में जब … Continue reading
पँछी रे ओ पँछी, उड़ जा रे ओ पँछी मत छेड़ तू ये तराने, हो जाएँ ना दो दिल दीवाने पँछी रे ओ पँछी, उड़ जा रे ओ पँछी हम क़रीब आ गए, मंज़िलों को पा गए भा गया हमें कोई, हम किसीको भा गए पँछी रे ओ पँछी, उड़ जा रे ओ पँछी … … Continue reading
कहाँ चला रे, कहाँ चला रे कहाँ तेरा कौन तेरी राह तके रे हमको इतना बता जा कहाँ चला रे, कहाँ चला रे कौन दूर-नगरी के छोर से, खींचे तोहे जादू के ज़ोर से बाँध लिया किसने जिया तेरा, बड़े-बड़े नैनों की डोर से कहाँ चला रे, कहाँ चला रे … झूम-झूम झोंका बयार का, … Continue reading
नाच रे धरती के प्यारे, तेरे अरमानों की दुनिया समने है तेरे आज तेरे घर होने को हैं फिर ख़ुशियों के फेरे धान की बाली, ये हरियाली कहती है तुझसे रे जैसे-तैसे कट गई ग़म की रात काली गली-गली शोर है, आएगी दीवाली कड़ी मेहनत की फ़सल, अपने धीरज का ये फल, मीठा लागे रे … Continue reading