Songs of Shailendra::
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१९६४ – मेम दीदी – रातों को जब नींद उड़ जाए | 1964 – Mem Didi – raton ko jab neend ud jaye

रातों को जब नींद उड़ जाए, घड़ी-घड़ी याद कोई आए किसी भी सूरत से बहले ना दिल तब क्या किया जाए, बोलो क्या किया जाए ये तो प्यार का रोग है, रोग बुरा जिसे एक दफ़ा ये लगा सो लगा चँदा को देख आग लग जाए, तन्हाई में चाँदनी न भाए ठण्डी हवाओं में काँपे … Continue reading

१९६४ – मेम दीदी – मैं जानती हूँ | 1964 – Mem Didi – main janati hoon

मैं जानती हूँ, तुम झूठ बोलते हो फिर भी कहो अजी फिर से कहो, तुमको मुझसे प्यार है तुम जानती हो, मैं सच बोलता हूँ फिर भी सुनो लो फिर से सुनो, मुझको तुमसे प्यार है मैं जानती हूँ आँखों में झाँको मेरे सपनों की रानी पढ़के तो देखो मेरे दिल की कहानी मैं जानती … Continue reading

१९६४ – मेम दीदी – बचपन ओ बचपन | 1964 – Mem Didi – bachpan o bachpan

बचपन ओ बचपन, प्यारे-प्यारे बचपन हो ल ला, सच बतला कहाँ गया तू छोड़के घर में सहन में ढूँढ़ा, जंगल में बन में ढूँढ़ा कलियों से जाके पूछा, सारे चमन में ढूँढ़ा रिश्ते वो सारे तोड़के बचपन ओ बचपन … जिस दिन से तू गया है, ये दिल मचल रहा है दुनिया है कुछ अजब-सी, … Continue reading

१९५९ – मैं नशे में हूँ – मुझको यारो माफ़ करना | 1959 – Main Nashe Mein Hoon – mujh ko yaaro maaf karna

ज़ाहिद शराब पीने दे, मस्जिद में बैठकर या वो जगह बता दे जहाँपर ख़ुदा न हो मुझको यारो माफ़ करना, मैं नशे में हूँ अब तो मुमकिन है बहकना, मैं नशे में हूँ मुझको यारो माफ़ करना, मैं नशे में हूँ कल की यादें मिट रही हैं, दर्द भी है कम अब ज़रा आराम से … Continue reading

१९५९ – मैं नशे में हूँ – नज़र-नज़र से हो रही है बात प्यार की | 1959 – Main Nashe Mein Hoon – nazar nazar se ho rahi hai baat pyar ki

नज़र-नज़र से हो रही है बात प्यार की मचल-मचल रही है रात ये बहार की घड़ी नहीं ये सब्र की न इंतज़ार की मचल-मचल रही है रात ये बहार की बहक चले, लहक चले दिल के ये अरमाँ इधर भी हैं उधर भी हैं एक-से तूफ़ाँ ये रात प्यार की, दिलों के हार की नज़र-नज़र … Continue reading

१९५३ – मयूरपंख – मैं तो चलूँ पश्चिम | 1953 – Mayurpankh – main to chaloon pashchim

मैं तो चलूँ पश्चिम, पूरब चले दुनिया मेरी क़िस्मत पे बड़ी जले दुनिया जबसे किसीको बसाया है दिल में हलचल है ग़ैरों की हर महफ़िल में मेरे घर चँदा, सूरज तले दुनिया मेरी क़िस्मत पे बड़ी जले दुनिया मैं तो चलूँ पश्चिम … सपनों में वो जबसे आने लगे हैं शाम-ओ-सहर मुस्कुराने लगे हैं मेरी … Continue reading

१९५३ – मयूरपंख – ये बरखा बहार | 1953 – Mayurpankh – ye barkha bahar

ये बरखा बहार सौतनिया के द्वार न जा मोरे साँवरे पिया न जा मोरे साँवरे पिया अँधेरी रात, घटाओं से दर्द बरसेगा तेरे बिना जलेगी सेज, प्यार तरसेगा मैं रो-रो मरूँ, तोरे पैंया पड़ूँ न जा मोरे साँवरे पिया ये बरखा बहार … तेरे बग़ैर क्या मज़ा है ज़िंदगानी में न जाओ बेरहम, लगाके आग … Continue reading

१९५३ – मयूरपंख – तंदाना तंदाना … मुश्किल है प्यार छुपाना | 1953 – Mayurpankh – tandana tandana … mushkil hai pyar chhupana

तंदाना तंदाना तंदाना, तंदाना मुश्किल है प्यार छुपाना, तंदाना तंदाना तंदाना तंदाना, तंदाना प्रीत नई दर्द पुराना, तंदाना तू कहीं और का, मैं कहीं और की भँवरा कहीं और का, कली कहीं और की फिर भी हैं मिलने के लाख बहाने तंदाना तंदाना तंदाना, तंदाना नैना चुराके न जाना, तंदाना मौसम बहार का एक बार … Continue reading

१९५८ – मधुमती – टूटे हुए ख़्वाबों ने | 1958 – Madhumati – toote hue khwabon ne

टूटे हुए ख़्वाबों ने, हमको ये सिखाया है दिल ने जिसे पाया था, आँखों ने गँवाया है टूटे हुए ख़्वाबों ने हम ढूँढ़ते हैं उनको, जो मिलके नहीं मिलते रूठे हैं न जाने क्यूँ, मेहमाँ वो मेरे दिल के क्या अपनी तमन्ना थी, क्या सामने आया है दिल ने जिसे पाया था, आँखों ने गँवाया … Continue reading

१९५८ – मधुमती – जंगल में मोर नाचा | 1958 – Madhumati – jungle mein mor naacha

जंगल में मोर नाचा, किसीने ना देखा हम जो थोड़ी-सी पीके ज़रा झूमे, हाय रे सब ने देखा जंगल में मोर नाचा, किसीने ना देखा गोरी की गोल-गोल अँखियाँ शराबी कर चुकी हैं कैसे-कैसों की ख़राबी इनका ये ज़ोर-ज़ुल्म किसीने ना देखा हम जो थोड़ी-सी पीके ज़रा झूमे, हाय रे सब ने देखा जंगल में … Continue reading