Songs of Shailendra::
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१९५४ – नौकरी – अर्ज़ी हमारी ये मर्ज़ी हमारी | 1954 – Naukri – arzi hamari ye marzi hamari

अर्ज़ी हमारी, ये मर्ज़ी हमारी जो सोचे बिना ठुकराओगे, देखो बड़े पछताओगे दिल ही हमारा बचा न बेचारा, तो किस पे ये तीर चलाओगे देखे हैं तुम्हारे सपने, सोची हैं तुम्हारी बातें देखा है वो चँदा जबसे, आँखों में गुज़ारी रातें रुनझुन मन में धूम मचाके, हौले-हौले आके ये आग लगाके जो और कहीं चले … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – अरे भाई निकलके आ घर से | 1956 – New Delhi – are bhai nikalke aa ghar se

अरे भाई निकल के आ घर से आ घर से दुनिया की रौनक देख फिर से देख ले फिर से अरे भाई निकल के आ घर से केम ऊंघे छे भाई घनशामजी हो केम ऊंघे छे भाई घनशामजी दुनिया बदल गई प्यारे आगे निकल गई प्यारे अँधे कुँए में छुपके क्यूँ बैठा हुआ है मन … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – गोरी तेरे सपनों के सजना | 1956 – New Delhi – gori tere sapnon ke sajna

गोरी तेरे सपनों के सजना आए तेरे अंगना कर ले सोलह सिंगार हो जा जाने को अब तैयार लेके डोली खड़े हैं कहार कल से बालम के रंग रंग जाएगी तू उनके मन के महल को सजाएगी तू बीते जो दिन भूल जाना सखी भूल जाना वो बचपन का प्यार लेके डोली खड़े हैं कहार … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए | 1956 – New Delhi – milte hi nazar aap mere dil mein aa gaye

मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए अफ़्सोस है कि आप भी मुश्किल में आ गए मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए दिल के कहने पे बढ़ते गए ये क़दम क्या ख़बर थी डगर भूल जाएँगे हम जाते थे कहीं और कहीं और आ गए मिलते-ही नज़र … नैन जादूभरे मुस्कुराते गए … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – नख़रेवाली, देखने में देख लो हैं कैसी | 1956 – New Delhi – nakhrewali dekhne mein dekh lo hain kaisi bholi bhali

नख़रेवाली देखने में देख लो हैं कैसी भोली-भाली अजनबी ये छोरियाँ, दिल पे डालें डोरियां मन की काली वो तो कोई और थी जो आँखों से समा गई दिल में बेरहम, बेवफ़ा, अपना कुछ अता-पता बता तो दे बेकली, बेकसी, कुछ तो कम हो फिर से मुस्कुरा तो दे वो तो कोई और थी जो … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – तुम संग प्रीत लगाई रसिया | 1956 – New Delhi – tum sang preet lagayi rasiya

तुम संग प्रीत लगाई रसिया मैंने जानके जान गँवाई रसिया ओ हाय मैं मर गई, बेदर्दी तेरे प्यार में गोरी-गोरी रात के गोरे-गोरे चाँद की तुझको क़सम राजा, लौटके आजा पहले मिलन की रंगभरी शाम को कैसे भुलाऊँ सैंया, तू ही बता जा मौसम ले अंगड़ाई रसिया मैंने जानके जान गँवाई रसिया ओ हाय मैं … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – ज़िंदगी बहार है मोहब्बत की बहार से | 1956 – New Delhi – zindagi bahar hai mohabbat ki bahar se

ज़िंदगी बहार है मोहब्बत की बहार से दिल से दिल को प्यार है, फिर क्यूँ डरना संसार से।। मैं गुमसुम, तुम भी चुप थे पर आँखों ने सब कह डाला मेरे प्यार में पहनी वरमाला ज़िंदगी बहार है … मैं नाचूँ मेरा मन नाचे मेरे संग-संग सारा जग नाचे मची धूम, ख़ुशी की धुन बाजे … Continue reading →

१९६० – परख – मेरे मन के दिये | 1960 – Parakh – mere man ke diye

मेरे मन के दिये, मेरे मन के दिये यूँही घुट-घुटके जल तू, मेरे लाडले, ओ मेरे लाडले ख़ाक हो जाएँ हम प्यार के नाम पर प्यार की राह में रौशनी तो रहे मेरे मन के दिये … आग के फूल आँचल में डाले हुए कबसे जलता है वो आसमाँ देख ले मेरे मन के दिये … Continue reading →

१९६० – परख – ये बँसी क्यूँ गाए | 1960 – Parakh – ye bansi kyun gaye

ये बंसी क्यूँ गाए, मुझे क्यूँ सताए ये क्या धुन सुनाए, दूर न जाने काहे मुझको बुलाए, हाय बंसी क्यूँ गाए ये बंसी नदिया के तीर मोहे देखके अकेली मुझको सिखाने आई प्रीत-पहेली जिया उलझाए, मोहे ललचाए, कित जाऊँ, हाय बंसी क्यूँ गाए … हो बंसी बस में ना दिल ना ये नैन हमारे बचपन … Continue reading →

१९६० – परख – क्या हवा चली बाबा रुत बदली | 1960 – Parakh – kya hawa chali baba rut badli

क्या हवा चली, बाबा, रुत बदली क्या हवा चली, रे बाबा, रुत बदली शोर है गली-गली, सौ-सौ चूहे खायके बिल्ली हज को चली क्या हवा चली … पहले लोग मर रहे थे भूख से अभाव से अब कहीं ये मर न जाएँ अपनी खाव-खाव से मीठी बात कडवी लगे, गालियाँ भली क्या हवा चली … … Continue reading →