Songs of Shailendra::
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Hemant

This category contains 11 posts

१९५६ – परिवार – झिरझिर-झिरझिर बदरवा बरसें हो कारे-कारे | 1956 – Parivar – jhirjhir jhirjhir badarwa barsen ho kare kare

झिरझिर-झिरझिर बदरवा बरसें हो कारे-कारे सोए अरमान जागे, कई तूफ़ान जागे माने ना मन मोरा सजना बिना झिरझिर-झिरझिर बदरवा बरसें हो कारे-कारे, झिरझिर-झिरझिर आजा कि तोहे मेरी प्रीत पुकारे तुझको ही आज तेरा गीत पुकारे याद आईं बीती बातें, तुमसे मिलन की रातें काहे को भूले मोहे अपना बना झिरझिर-झिरझिर बदरवा बरसें हो कारे-कारे झिरझिर-झिरझिर … Continue reading →

१९५३ – शिकस्त – हम तो हैं खेल-खिलौने | 1953 – Shikast – hum to hain khel khilaune

हम कठपुतले काठ के, हमें तू नाच नचाए ऊँचे आसन बैठके, अपना दिल बहलाए हम तो हैं खेल-खिलौने, खेलो जी-भरके राम दुख या सुख जो भी चाहो, ले लो जी-भरके राम खेलो जी-भरके राम हर पल चंचल मन नाचे, हर पल आशा दीवानी लेकिन हर सपना टूटे, रह जाए दर्द निशानी गुपचुप करनी करते हो, … Continue reading →

१९५९ – नई राहें – कल के चाँद आज के सपने | 1959 – Nai Raahen – kal ke chand aaj ke sapne

कल के चाँद, आज के सपने, तुमको प्यार, बहुत-सा प्यार लाल, तुम्हारे-ही दम से कल जगमग होगा ये संसार कल के चाँद, आज के सपने, तुमको प्यार, बहुत-सा प्यार आँखमिचौली खेलेगा कल तुमसे आँगन मेरा संग तुम्हारे लौट आएगा रूठा बचपन मेरा अब तुतलाकर बात करेंगे ये दरवाज़े ये दीवार लाल, तुम्हारे-ही दम से कल … Continue reading →

१९५९ – हीरा मोती – नाच रे धरती के प्यारे | 1959 – Heera Moti – nach re dharti ke pyare

नाच रे धरती के प्यारे, तेरे अरमानों की दुनिया समने है तेरे आज तेरे घर होने को हैं फिर ख़ुशियों के फेरे धान की बाली, ये हरियाली कहती है तुझसे रे जैसे-तैसे कट गई ग़म की रात काली गली-गली शोर है, आएगी दीवाली कड़ी मेहनत की फ़सल, अपने धीरज का ये फल, मीठा लागे रे … Continue reading →

१९५८ – डिटेक्टिव – मुझको तुम जो मिले ये जहाँ मिल गया | 1958 – Detective – mujhko tum jo mile ye jahan mil gaya

मुझको तुम जो मिले, ये जहाँ मिल गया तुम जो मेरे दिल में हँसे, दिल का कमल देखो खिल गया मुझको तुम जो मिले, ये जहाँ मिल गया ये भीगती हुई फ़िज़ा, बरस रही है चाँदनी तारों ने मिलके छेड़ दी, मधुर मिलन की रागिनी लेके क़रार आया है प्यार, क्या है अगर मेरा दिल … Continue reading →

१९५४ – बादशाह – रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे | 1954 – Badshah – rulakar chal diye ek din hansi bankar jo aaye the

रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे चमन रो-रोके कहता है, कभी गुल मुस्कुराए थे रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे अगर दिल के ज़ुबाँ होती, ये ग़म कुछ कम तो हो जाता उधर वो चुप, इधर सीने में हम तूफ़ाँ छुपाए थे ये अच्छा था न हम … Continue reading →

१९५४ – अमानत – जबसे मिलीं तोसे अँखियाँ | 1954 – Amaanat – jab se milin tose ankhiyan

ओ जबसे मिलीं तोसे अँखियाँ, जियरा डोले रे डोले हो डोले हो मीठे-मीठे प्यार के ये हिंचकोले, जिया डोले रे डोले हो डोले ओ जबसे मिलीं तोसे अँखियाँ डोले हे डोले ये दिल की दुनिया, मैं नहीं अपने बस में वो मन में छुपा एक चोर है जो, मेरे जी की बतियाँ खोले ओ जबसे … Continue reading →

१९५३ – आग़ोश – मिल-जुल के काटो लोगो ग़रीबी के फंदे | 1953 – Aagosh – miljul ke kaato logo garibi ke phande

मिलजुलके काटो ग़रीबी के फंदे मिलजुलके काटो रे लोगो, दुख-सुख बाँटो रे बड़ी दयावान भाई बड़ी मेहेरबान है हम सब पे ये धरतीमाता, धरतीमाता सोने की खान कहीं गेहूं कहीं धान रे हम सबकी ये अन्नदाता, धरतीमाता फिर भी आसमाँ के तले, काहे भूख-प्यास पले दुख-सुख बाँटो रे मिलजुलके काटो … जीवन के सागर में … Continue reading →

१९५३ – आग़ोश – हो धीरे-धीरे चढ़ गया नदी में पानी | 1953 – Aagosh – ho dheere dheere chadh gaya nadiya mein paani

हो धीरे-धीरे चढ़ गया नदी में पानी हो धीरे-धीरे कोई कहे तूफ़ान उठा, कोई कहे रे आई जवानी हो धीरे-धीरे चढ़ गया नदी में पानी हो धीरे-धीरे दिल में बैठा कोई दिल की धड़कन गिनता जाए मेरे मन के भेद चुराकर अपने भेद छुपाए जो-जो मेरी प्रीत बढ़े, मैं होती जाऊँ दीवानी हो धीरे-धीरे चढ़ … Continue reading →

१९७१ – दूर का राही – चलती चली जाए ज़िंदगी की डगर | 1971 – Door Ka Rahi – chalti chali jaye zindagi ki dagar

Film Door Ka Rahi Music Director Kishore Kumar Year 1971 Singer(s) Hemant Audio Video On Screen Kishore Kumar चलती चली जाए, ज़िंदगी की डगर कभी ख़त्म न हो, ये सफ़र मंज़िल की उसे, कुछ भी न ख़बर फिर भी चला जाए, दूर का राही मुड़के न देखे, कुछ भी न बोले भेद अपने दिल का, … Continue reading →