Songs of Shailendra::
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Asha

This category contains 56 posts

१९६७ – हरे काँच की चूड़ियाँ – पँछी रे ओ पँछी | 1967 – Hare Kaanch Ki Choodiyan – panchhi re o panchhi

पँछी रे ओ पँछी, उड़ जा रे ओ पँछी मत छेड़ तू ये तराने, हो जाएँ ना दो दिल दीवाने पँछी रे ओ पँछी, उड़ जा रे ओ पँछी हम क़रीब आ गए, मंज़िलों को पा गए भा गया हमें कोई, हम किसीको भा गए पँछी रे ओ पँछी, उड़ जा रे ओ पँछी … … Continue reading →

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – छोड़ मेरी बैंया बलम | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – chhod meri bainya balam

आह! छोड़ मेरी बैंया, बलम बेईमान आते-जाते देख लेगा कोई छुईमुई जैसी नन्ही-सी मेरी जान आते-जाते देख लेगा कोई छोड़ मेरी बैंया आहा! निकली थी लेने बलम बगिया से फूल बातों-बातों में तेरी, राह गई भूल हाय रे, मैं आई कहाँ, छूटा घर मेरा वहाँ उड़ती है दूर जहाँ, भेदभरी धूल लागे डर मुझको यहाँ, … Continue reading →

१९६२ – दिल तेरा दीवाना – रिक्शे पे मेरे तुम आ बैठे | 1962 – Dil Tera Diwana – riskhe pe mere tum aa baithe

रिक्शे पे मेरे तुम आ बैठे, अब मेरा हुनर देखो देता है मज़े कैसे-कैसे अपना ये सफ़र देखो रिक्शे पे तुम्हारे आ बैठी, ख़ुशियाँ हैं जिधर देखो ले पहुँची मुझे किस दुनिया में, चाहत की लहर देखो रिक्शे पे मेरे तुम आ बैठे … दुलकी चलूँ मैं, सरपट चलूँ मैं, हर चाल है निराली निकलूँ … Continue reading →

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – खोया-खोया चँदा खोए-खोए तारे | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – khoya khoya chanda khoye khoe tare

खोया-खोया चँदा, खोए-खोए तारे सो गए, तू भी सो जा चाँद हमारे खोया-खोया चँदा, खोए-खोए तारे लेके जादू की छड़ी, आई सपनों की परी रूपनगरी में तुझे छोड़ आएगी अभी है वो सपनों का जहाँ, एक मेला है वहाँ देस-परदेस के बच्चे चले वहाँ नीले आकाश के गंगा के किनारे खोया-खोया चँदा … झूला चाँदी … Continue reading →

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – पथभूला एक आया मुसाफ़िर | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – pathbhoola ek aaya musafir

पथभूला एक आया मुसफ़िर, लेके मेरा मन दूर चला बिखरे सपने, रह गईं यादें, रात से पहले चाँद ढला पथभूला कोई न समझे, कोई न जाने, दिल की लगी है क्या लाख छुपाऊँ, छुप न सके ये प्रेम का रोग बुरा पथभूला एक आया मुसफ़िर, लेके मेरा मन दूर चला पथभूला दिल कहता है रोक … Continue reading →

१९५८ – डिटेक्टिव – राही चल सँभलके | 1958 – Detective – rahi chal sambhal ke

राही चल सँभल-सँभलके है बड़ा कठिन ये रास्ता बड़ा कठिन है रस्ता ये प्यार का राही चल सँभल-सँभलके है बड़ा कठिन ये रास्ता ये गली लागे भली, दिल तेरा चुराए रे आगे जाकर किसीकी समझ में ना आए रे खो ना जाना, तू कहीं खो ना जाना राही चल सँभल-सँभलके … जो नज़र तुझको उधर … Continue reading →

१९५९ – दीप जलता रहे – छम छम छम छम गीत सुनाए | 1959 – Deep Jalta Rahe – chham chham chham chham geet sunaye

छम छम छम छम गीत सुनाए मेरी पायल गाए दिन आए मिलन के, बालमा खींच बुलाए बाहर कोई, आँगन में मेरा जी ना लगे हो जाऊँगी आज मैं उनकी, जिन संग मेरे नैन लगे जिया लहराए, मेरे बस में न आए दिन आए मिलन के, बालमा छम छम छम छम गीत सुनाए ऊदे रे ऊदे … Continue reading →

१९५९ – दीप जलता रहे – देखो जी रस ले गयो भँवरा बेईमान | 1959 – Deep Jalta Rahe – dekho ji ras le gayo bhanwra beiman

देखो जी रस ले गयो भँवरा बेईमान बेचारी कली क्या करे छोटी-सी जान देखो जी रस ले गयो भँवरा बेईमान नई-नवेली, दिन थे बहार के बाग़ में थी वो अकेली, कि हाय राम, बाग़ में थी वो अकेली बाली उमर में कोई क्या जाने क्या है प्रीत पहेली, कि हाय राम, क्या है प्रीत पहेली … Continue reading →

१९५९ – दीप जलता रहे – एक दौर नया दुनिया में शुरु हुआ | 1959 – Deep Jalta Rahe – ek daur naya duniya mein shuru hua

एक दौर नया दुनिया में शुरु बच्चों के क़दम से होगा बदनाम हो जिससे देश अपना, वो काम ना हमसे होगा ये राम और श्रीकृष्ण की धरती, धरती बुद्ध महान की युग-युग से इस मिट्टी ने अगवाई की इन्सान की ये देश है अर्जुन-भीम का, राणा प्रताप-से वीर का कुछ करके दिखाएँगे हम भी, कुछ … Continue reading →

१९५९ – दीप जलता रहे – डाली पे बैठी थी दस चिड़ियाँ | 1959 – Deep Jalta Rahe – daali pe baithi thi das chidiyan

डाली पे बैठी थीं दस चिड़ियाँ एक उड़ गई फुर्र से न जाने कहाँ तो रह गई डाली पे कितनी चिड़ियाँ, कितनी चिड़ियाँ नौ चिड़ियाँ, हाँ नौ चिड़ियाँ उड़ते-उड़ते चिड़िया पहुँची कमला नेहरू पार्क में जहाँ पे हँसती थी हर क्यारी फूलोंवाली फ़्राक में कमला नेहरू पार्क की निराली शान-बान बच्चो तुमने देखा है वो … Continue reading →