Songs of Shailendra::
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Shankar-Jaikishan

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१९६७ – दीवाना – हम तो जाते अपने गाम | 1967 – Diwana – hum to jate apne gaam

मुबारक देने आए थे, मुबारक देके जाते हैं मिला है बहुत कुछ, सीने में जो हम लेके जाते हैं हम तो जाते अपने गाम, अपनी राम-राम-राम अपनी राम-राम-राम, सबको राम-राम-राम हम तो जाते अपने गाम, अपनी राम-राम-राम सबको राम-राम-राम कभी जो कह ना पाए बात, वो होंठों पे अब आई अदालत उठ चुकी है, अब … Continue reading →

१९६७ – दीवाना – पते की बात कहेगा कहेगा जब भी दीवाना | 1967 – Diwana – pate ki baat kahega kahega jab bhi

पते की बात कहेगा, कहेगा जब भी दीवाना मेरी सूरत पे न जाना, मेरी सूरत पे न जाना पते की बात कहेगा, कहेगा जब भी दीवाना वहाँ कुछ देर है प्यारे, नहीं अँधेर है प्यारे जो तुझको ना दिखाई दे, नज़र का फेर है प्यारे तू बहकावे में न आना, है उसका सब जग जाना … Continue reading →

१९६७ – दीवाना – तुमको सनम पुकारके चल दें न दिन बहार के | 1967 – Diwana – tum ko sanam pukar ke

तुमको सनम पुकारके, चल दें न दिन बहार के आ जाओ, तड़पते हैं हम आ भी जाओ, तड़पते हैं हम तुम बिन तो इस जहाँ में कोई नहीं हमारा बस एक आस तुमसे, एक आसरा तुम्हारा तुमको सनम पुकारके … ये बात अपने दिल की, हम कह न पाए तुमसे लेकिन छुप ही क्या है, … Continue reading →

१९६० – दिल अपना और प्रीत पराई – मेरा दिल अब तेरा ओ साजना | 1960 – Dil Apna Aur Preet Parai – mera dil ab tera o saajna

मेरा दिल अब तेरा, ओ साजना कैसा जादू फेरा, ओ साजना मेरा दिल अब तेरा, ओ साजना नैन हमारे तुम संग लागे, तुम संग प्रीत हमारी मन भाए तुम जानो न जानो, जाने है दुनिया सारी कोई और न मेरा, ओ साजना मेरा दिल अब तेरा … मोरनी बनके राह तकूँ मैं, तुम बादल बन … Continue reading →

१९६० – दिल अपना और प्रीत पराई – अंदाज़ मेरा मस्ताना | 1960 – Dil Apna Aur Preet Parai – andaz mera mastana

अंदाज़ मेरा मस्ताना, माँगे दिल का नज़राना ज़रा सोच के आँख मिलाना, हो जाए न तू दीवाना कि हम भी जवाँ हैं, समाँ भी जवाँ है न फिर हमसे कहना, मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है प्यार की किताब हूँ मैं, सच हूँ फिर भी ख़्वाब हूँ मैं देखकर सुरूर आए, वो अजब … Continue reading →

१९५२ – दाग़ – लागे जब से नैन लागे | 1952 – Daag – laage jab se nain laage

लागे, जब से नैन लागे दिल तो गया, क्या जाने उल्फ़त में क्या होगा आगे जब से नैन लागे हम उनके घर आके शर्मा रहे हैं क्यूँ खुल गए भेद पछता रहे हैं बँधने लगे लो मोहब्बत के धागे जब से नैन लागे, हो जब से नैन लागे … सपने भी उनके, ये निंदिया भी … Continue reading →

१९५२ – दाग़ – प्रीत ये कैसी बोल री दुनिया | 1952 – Daag – preet ye kaisi bol ri duniya

प्रीत ये कैसी बोल री दुनिया, प्रीत ये कसी बोल री दुनिया, प्रीत ये कैसी बोल धूल में मन का हीरा रोवे, कोई न पूछे मोल दुनिया, बोल री दुनिया बोल देखूँ मैं इक सुंदर सपना, ढूँढ़ूँ तारों में घर अपना अँधी क़िस्मत तोड़ रही है ये सपने अनमोल दुनिया, प्रीत ये कैसी बोल डूब … Continue reading →

१९५५ – चोरी चोरी – ये रात भीगी-भीगी | 1955 – Chori Chori – ye raat bheegi bheegi

ये रात भीगी-भीगी, ये मस्त फ़िज़ाएँ, उठा धीरे-धीरे वो चाँद प्यारा-प्यारा क्यूँ आग-सी लगाके गुमसुम है चाँदनी, सोने भी नहीं देता मौसम का ये इशारा इठलाती हवा, नीलम-सा गगन, कलियों पे ये बेहोशी की नमी ऐसे में भी क्यूँ बेचैन है दिल, जीवन में न जाने क्या है कमी क्यूँ आग-सी लगाके गुमसुम है चाँदनी, … Continue reading →

१९५२ – दाग़ – देखो आया ये कैसा ज़माना | 1952 – Daag – dekho aaya ye kaisa zamana

देखो आया ये कैसा ज़माना ये दुनिया अजायबखाना, रे देखो आया ये कैसा ज़माना काली घोडी पे बैठके, कल हम गए बजार तेल तो देखा था पहले से, और देखी तेल की धार जो कुछ देखा, देखके हमको, याद आए श्रीरामा, रे देखो आया ये कैसा ज़माना … चोर की चौकीदारी देखी, और अँधों की … Continue reading →

१९५५ – चोरी चोरी – मनभावन के घर जाए गोरी | 1955 – Chori Chori – manbhawan ke ghar jaye gori

मनभावन के घर जाए गोरी घूँघट में शरमाए गोरी बँधी रहे ये प्यार की डोरी हमें ना भुलाना, हमें ना भुलाना बचपन के दिन खेल गँवाए, आई जवानी तो बालम आए तेरे आँगन बजे बधाई गोरी, क्यूँ नैना छलकाए गोरी बँधी रहे ये प्यार की डोरी हमें ना भुलाना, हमें ना भुलाना इस दुनिया की … Continue reading →