गोरी तेरे सपनों के सजना आए तेरे अंगना कर ले सोलह सिंगार हो जा जाने को अब तैयार लेके डोली खड़े हैं कहार कल से बालम के रंग रंग जाएगी तू उनके मन के महल को सजाएगी तू बीते जो दिन भूल जाना सखी भूल जाना वो बचपन का प्यार लेके डोली खड़े हैं कहार … Continue reading
मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए अफ़्सोस है कि आप भी मुश्किल में आ गए मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए दिल के कहने पे बढ़ते गए ये क़दम क्या ख़बर थी डगर भूल जाएँगे हम जाते थे कहीं और कहीं और आ गए मिलते-ही नज़र … नैन जादूभरे मुस्कुराते गए … Continue reading
नख़रेवाली देखने में देख लो हैं कैसी भोली-भाली अजनबी ये छोरियाँ, दिल पे डालें डोरियां मन की काली वो तो कोई और थी जो आँखों से समा गई दिल में बेरहम, बेवफ़ा, अपना कुछ अता-पता बता तो दे बेकली, बेकसी, कुछ तो कम हो फिर से मुस्कुरा तो दे वो तो कोई और थी जो … Continue reading
तुम संग प्रीत लगाई रसिया मैंने जानके जान गँवाई रसिया ओ हाय मैं मर गई, बेदर्दी तेरे प्यार में गोरी-गोरी रात के गोरे-गोरे चाँद की तुझको क़सम राजा, लौटके आजा पहले मिलन की रंगभरी शाम को कैसे भुलाऊँ सैंया, तू ही बता जा मौसम ले अंगड़ाई रसिया मैंने जानके जान गँवाई रसिया ओ हाय मैं … Continue reading
ज़िंदगी बहार है मोहब्बत की बहार से दिल से दिल को प्यार है, फिर क्यूँ डरना संसार से।। मैं गुमसुम, तुम भी चुप थे पर आँखों ने सब कह डाला मेरे प्यार में पहनी वरमाला ज़िंदगी बहार है … मैं नाचूँ मेरा मन नाचे मेरे संग-संग सारा जग नाचे मची धूम, ख़ुशी की धुन बाजे … Continue reading
जो मैं ऐसा जानती कि प्रीत किए दुख होय तो नगर ढिंढ़ोरा पीटती, कि प्रीत न करियो कोय काटे ना कटे रैना मोरे लागे उनसे नैना, रे काटे ना कटे रैना तुम्हारे वादे, कि ज्यों शराबी करे है तौबा नशे में आकर हमारी आदत, कि मुंतज़िर हैं, जवान रातों का दिल दुखाकर चँदा हँसे आकाश … Continue reading
करे-कारे बदरा, सूनी-सूनी रतिया, सजना बिजुरी जो चमके, धड़क जाए छतिया, सजना मैं अकेली पिया, लरजे मोरा जिया, ऐसे में तू न जा अंग लग जा बालमा, मोरे अंग लग जा बालमा मैं अकेली पिया, लरजे मोरा जिया, ऐसे में तू न जा मोरे अंग लग जा बालमा, मोरे अंग लग जा बालमा आज हवाएँ … Continue reading
सवेरेवाली गाड़ी से चले जाएँगे, सवेरेवाली गाड़ी से चले जाएँगे कुछ लेके जाएँगे हो कुछ देके जाएँगे सवेरेवाली गाड़ी से चले जाएँगे ये मेला दो घड़ी का, दो दिनों की है बहार समय की बहती धार कहती जाती है पुकार मेहमान कब रुके हैं कैसे रोके जाएँगे कुछ लेके जाएँगे हो कुछ देके जाएँगे सवेरेवाली … Continue reading
कोई मतवाला आया मेरे द्वारे अँखियों से कर गया अजब इशारे कोई मतवाला आया मेरे द्वारे क्या मन उसके मैं क्या जानूँ छलिया को मैं क्या पहचानूँ जाने क्यूँ मेरा नाम पुकारे कोई मतवाला आया … जबसे गया है भोला बचपन नैना चंचल, नटखट है मन अब नहीं कुछ भी बस में हमारे कोई मतवाला … Continue reading
क़रीब आओ, न तड़पाओ हमें कहना है कुछ तुमसे, तुम्हारे कानों में क़रीब आओ ग़म-ए-फ़ुर्क़त से हमें फ़ुर्सत है, मेरी क़िस्मत है कि आए तुम कुछ भी न लाए तो भी क्या ग़म है, यही क्या कम है कि आए तुम क़रीब आओ … झूमेगा ज़माना मेरी छम-छम पे, आज मौसम पे जवानी है तेरी … Continue reading