Songs of Shailendra::
archives

Salil Chowdhury

This category contains 78 posts

१९६० – हनीमून – छुओ ना छुओ ना अलबेले मेरे सैंया | 1960 – Honeymoon – chhuo na chhuo na albele mere sainya

छुओ ना छुओ ना, अलबेले मेरे सैंया, मैं तो नाज़ुक-बदन छुईमुई तू क़रीब आ, ना हमें सता, तेरे हो चुके हैं, तुझे दिल दिया अजी जाओ ना, ललचाओ ना, मीठी बातों से भरमाओ ना तू क़रीब आ, ना हमें सता, तेरे हो चुके हैं, तुझे दिल दिया छुओ ना छुओ ना, अलबेले मेरे सैंया, मैं … Continue reading →

१९५६ – जागते रहो – जागो मोहन प्यारे | 1956 – Jagte Raho – jago mohan pyare

जागो जागो जागो जग उजियारा छाए, मन का अँधेरा जाए किरनों की रानी गाए, जागो हे मेरे मनमोहन प्यारे जाग रे जाग रे जाग, कलियाँ जागीं नगर-नगर सब गलियाँ जागीं जाग रे जाग रे जाग रे, जाग रे जाग रे जाग जाग जागो मोहन प्यारे, जागो नवयुग चूमे नैन तिहारे जागो, जागो, जागो मोहन प्यारे … Continue reading →

१९५६ – जागते रहो – ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार | 1956 – Jagte Raho – thandi thandi sawan ki phuahr

ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार, पिया आज खिड़की खुली मत छोड़ो आवे झोंके से पगली बयार, पिया आज बाती जली मत छोड़ो ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार दिये की ज्योति अँखियों में लागे, पलकों पे निंदिया सवार पिया आज बाती जली मत छोड़ो ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार पपीहे ने मन की अग्नि बुझा ली, प्यासा रहा मेरा … Continue reading →

१९६२ – हाफ़ टिकट – चाँद रात तुम हो साथ | 1962 – Half Ticket – chand raat tun ho sath

चाँद-रात, तुम हो साथ क्या करें, अजी अब तो दिल मचल-मचल गया दिल का ऐतबार क्या क्या करोगे जी, कल जो ये बदल-बदल गया जुल्मी नज़र, कैसी निडर, दिल चुरा लिया जाने किस अजब-से देश में बुला लिया ये भी कोई दिल है क्या जहाँ मौका मिला फिसल-फिसल गया चाँद-रात, तुम हो साथ … सुनिये … Continue reading →

१९५७ – एक गाँव की कहानी – ओ हाय कोई देख लेगा | 1957 – Ek Gaon Ki Kahani – o haay koi dekh legaa

ओ हाय, कोई देख लेगा मेरे संग पिया, घबराए मोरा जिया रे हाय, कोई देख लेगा ओ, कोई क्या देख लेगा प्रीत की ये डोरी, दुनिया की नहीं चोरी रे कोई क्या देख लेगा मैं तो ये प्रेम-गली पहले पहल आज चली मेरे संग पिया, घबराए मोरा जिया रे हाय, कोई देख लेगा ओ, परदेसी … Continue reading →

१९६१ – चार दीवारी – गोरी बाबुल का घरवा | 1961 – Char Diwari – gori babul ka gharwa

गोरी, बाबुल का घरवा अब है बिदेसवा साजन के चरणों में घर है तेरा ओ गोरी, चार दीवारी, अंगना, अटारी यही तेरी दुनिया, ये जग है तेरा गोरी, बाबुल का घरवा आई है तू, बगिया में जैसे बहार आई रे आँचल में प्यार, अँखियों में सपने हज़ार लाई रे बड़ी गहरी नदिया के पार आई … Continue reading →

१९६१ – चार दीवारी – नींदपरी लोरी गाए | 1961 – Char Diwari – neend pari lori gaye

नींदपरी लोरी गाए, माँ झुलाए पालना सो जा मेरे लालना, सो जा मेरे लालना मीठे-मीठे सपनों में खो जा मेरे लालना नींदपरी लोरी गाए तूने मेरे मदभरे सपनों को रंग डाला तेरी दोनों अँखियोँ में दुनिया का उजियाला तू जो हँसे, झिलमिलाए दीपमाला नींदपरी लोरी गाए … तू ना होता ज़िंदगी में आहें होतीं सूनी-सूनी … Continue reading →

१९६१ – चार दीवारी – हमको समझ बैठी है दुनिया दीवाना | 1961 – Char Diwari – humko samajh baithi hai duniya deewana

हमको समझ बैठी है ये दुनिया दीवाना, दीवाना पर मैं अगर पागल हूँ, दुनिया है पागलख़ाना दीवाना, दीवाना हमको समझ बैठी है ये दुनिया दीवाना, दीवाना चाल बेढ़ंगी, दुनिया दोरंगी, मतलब की अँधी हमको न पूछे, पत्थर पूजे, दौलत की बंदी धोखे में मत आ जाना, दुनिया से दिल ना लगाना है बात ये पते … Continue reading →

१९६१ – चार दीवारी – कैसे मनाऊँ पियवा | 1961 – Char Diwari – kaise manaoon piyawa

कैसे मनाऊँ पियवा, गुण मेरे एकहू नाहीं आई मिलन की बेला, घबराऊँ मन माहीं कैसे मनाऊँ पियवा साजन मेरे आए, धड़कन बढ़ती जाए नैना झुकते जाएँ, घूँघट ढलका जाए तुझसे क्यूँ शर्माए, आज तेरी परछांईं कैसे मनाऊँ पियवा मैं अनजान पराई, द्वार तिहारे आई तुमने मुझे अपनाया, प्रीत की रीत निभाई हाय रे, मन की … Continue reading →

१९६१ – चार दीवारी – अकेला तुझे जाने न दूँगी | 1961 – Char Diwari – akela tujhe jane na doongi

अकेला तुझे जाने ना दूँगी बनके छैंया मैं संग-संग चलूँगी अकेला तुझे जाने ना दूँगी पूरब-दिस है जादू-टोना, भोला है मेरा सजन सलोना कोई बहका ले तो मैं क्या करूँगी अकेला तुझे जाने ना दूँगी चढ़ती नदिया बहता पानी, ढाए सौ-सौ जुलम जवानी गहरी धारा, मैं कब तक बहूँगी अकेला तुझे जाने ना दूँगी हमरा … Continue reading →