Songs of Shailendra::
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Lyrics

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१९६२ – हरियाली और रास्ता – बोल मेरी तक़्दीर में क्या है | 1962 – Hariyali Aur Rasta – bol meri taqdeer mein kya hai

बोल मेरी तक़्दीर में क्या है, मेरे हमसफ़र अब तो बता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता कहाँ है मेरे प्यार की मंज़िल, तू बतला, तुझको है पता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता जहाँ हम आके पहुँचे हैं, वहाँ से लौटकर जाना नहीं मुमकिन, मगर मुश्किल है दुनिया से भी … Continue reading

१९६२ – हरियाली और रास्ता – तेरी याद दिलसे भुलाने चला हूँ | 1962 – Hariyali Aur Rasta – teri yaad dil se bhulane chala hoon

तेरी याद दिल से भुलाने चला हूँ कि ख़ुद अपनी हस्ती मिटाने चला हूँ तेरी याद दिल से भुलाने चला हूँ घटाओ तुम्हें साथ देना पड़ेगा मैं फिर आज आँसू बहाने चला हूँ तेरी याद दिल से … कभी जिस जगह ख़्वाब देखे थे मैंने वहीं ख़ाक अपनी उड़ाने चला हूँ तेरी याद दिल से … Continue reading

१९५६ – हलाकू – अजी चले आओ, तुम्हें आँखों ने दिल में बुलाया | 1956 – Halaku – aji chale aao, tumhein aankhon ne dil mein bulaya

अजी चले आओ अजी चले आओ, तुम्हें आँखों ने दिल में बुलाया अब तो समझ जाओ अब तो समझ जाओ, क्यूँ निगाहों ने पर्दा गिराया अजी चले आओ दिल में उठती हैं कैसी उमंगें, तुमसे कानों में कहना पड़ेगा शर्त सुन लो मगर मेरे दिलबर, आके दिल में ही रहना पड़ेगा ज़रा मुस्कुराओ ज़रा मुस्कुराओ, … Continue reading

१९५६ – हलाकू – आजा कि इंतज़ार में | 1956 – Halaku – aa ja ki intezar mein

आजा कि इंतज़ार में, जाने को है बहार भी तेरे बग़ैर ज़िंदगी, दर्द बनके रह गई अरमाँ लिए बैठे हैं हम, सीने में है तेरा-ही ग़म तेरे दिल से प्यार की वो तड़प किधर गई आजा कि इंतज़ार में… दिल की सदा पे ऐ सनम, बढ़ते गए मेरे क़दम अब तो चाहे जो भी हो, … Continue reading

१९६६ – गबन – तुम्हारी क़सम तुम बहुत याद आए | 1966 – Gaban – tumhari qasam tum bahut yaad aaye

मैं हर रात जागी कि इस बार शायद मोहब्बत तुम्हें इस तरफ़ खींच लाए तुम्हारी क़सम तुम बहुत याद आए न पूछो, ये दिन हमने कैसे बिताए तुम्हारी क़सम तुम बहुत याद आए बरसने लगे शब तो क्या नींद आए उधर कडके बिजली, इधर जान जाए न पूछो, ये दिन हमने … ज़रा एक नज़र … Continue reading

१९६६ – गबन – आए रे दिन सावन के | 1966 – Gaban – aaye re din sawan ke

आए रे दिन सावन के, सावन के बलम तेरे आवन के, आवन के आए रे दिन सावन के तेरे प्यार का जोग लिया, मोहे लोग कहें दीवानी घर-घर की इस कहा-सुनी में, मैं बन गई कहानी आए रे दिन सावन के … दो नैनों के दीप जलाए, जागूँ सारी रैना कैसे लागे नैन पिया जब, … Continue reading

१९६० – एक फूल चार काँटे – मतवाली नार ठुमक-ठुमक | 1960 – Ek Phool Char Kaante – matwali naar thumak thumak chali jaye

मतवाली नार ठुमक-ठुमक चली जाए इन क़दमों पे किसका जिया ना झुक जाए मतवाली नार ठुमक-ठुमक चली जाए फूल बदन मुखड़ा यूँ दमके बादल में ज्यूँ बिजली चमके गीत सुनाके तू छम-छम के ललचाए, छुप जाए, हाय हाय मतवाली नार ठुमक-ठुमक … ये चंचल कजरारी आँखें ये चितचोर शिकारी आँखें गई दिल चीर कटारी आँखें … Continue reading

१९६० – एक फूल चार काँटे – सोच रही थी कहूँ ना कहूँ | 1960 – Ek Phool Char Kaante – soch rahi thi kahoon na kahoon

सोच रही थी कहूँ ना कहूँ, पर आज कहूँगी मेरे सनम तूने ले तो लिया दिल याद रहे मेरा जीना है मुश्किल तेरे बिना, तेरे बिना क्या मैं कहूँ सजना, मुझको हुआ क्या है मुझमें बसे हो तुम, तुमसे छुपा क्या है तुम ही सुनो अब कहता है क्या दिल याद रहे मेरा जीना है … Continue reading

१९६० – एक फूल चार काँटे – सँभल के करना जो भी करना | 1960 – Ek Phool Char Kaante – sambhal ke karna jo bhi karna

सँभलके करना, जो भी करना, नाज़ुक हाथोंवाले नाज़ुक हाथोंवाले लचक ना जाए नरम कलाई, पड़ ना जाएँ छाले पड़ ना जाएँ छाले सँभलके करना, जो भी करना हटाके पर्दे निकल पड़े हो, मुक़ाबला क्या तुम्हीं बड़े हो मगर ऐ जानाँ इधर तो देखो, हम भी हैं दिलवाले हम भी हैं दिलवाले सँभलके करना, जो भी … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – शाम गई रात आई कि बलम आ जा | 1955 – Shree 420 – sham gayi raat aayi ki balam aa ja

शाम गई रात आई, कि बलम आजा तारों की बरात आई, कि बलम आजा ओ बलम आजा, अब तो सनम आजा शाम गई रात आई, कि बलम आजा रात और दिन के मिलन की घड़ी में, ठण्डी-ठण्डी सावन की झड़ी में दो दिलों ने जो बाँधे थे बँधन, उनमें खोई खड़ी मैं, खड़ी मैं याद … Continue reading