Songs of Shailendra::
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Lyrics

This category contains 537 posts

१९६५ – चाँद और सूरज – किसीने जादू किया मैं करूँ क्या | 1965 – Chand Aur Suraj – kisi ne jadoo kiya main karoon kya

किसीने जादू किया, मैं करूँ क्या मेरा मन मोह लिया, मैं करूँ क्या किसीने जादू किया, मैं करूँ क्या करके घायल वो मुझे, बेख़बर हैं मेरी आहें भी वहाँ बेअसर हैं ख़ूब है ये अदा, मैं करूँ क्या किसीने जादू किया … रात मुश्किल से कटे, दिन हैं भारी सदा आँखों में रहे, छब वो … Continue reading →

१९६५ – चाँद और सूरज – झनन-झनन बाजे | 1965 – Chand Aur Suraj – jhanan jhanan baaje

झनन-झनन बाजे, बाजे झनन-झनन बाजे, बिछुआ बाजे, ननदी जागे कैसे आऊँ मितवा मोरे झनन-झनन आई व्दार पे जबसे ये रैन कजरारी देखूँ प्यार के सपने मैं बिरहा की मारी मोहे कोई न देखेगा, छाई रहेगी अँधियारी झनन-झनन बाजे … मैं तो लाज की मारी, कुछ बोलूँ ना किसीसे मेरा हाल कभी कोई पूछे मेरे जी … Continue reading →

१९६५ – चाँद और सूरज – मेरी और उनकी प्रीत पुरानी | 1965 – Chand Aur Suraj – meri aur unki preet purani

मेरी और उनकी प्रीत पुरानी चल-चल जाऊया मुंबईला मुंबई नगरी सबसे प्यारी वहीं बसे मनमीत मेरा हाँ रे रामा जी जी जी जी जी जी गई एक दिन पिया संग मैं आरे देखे रंगीन प्यारे नज़ारे लगा फूलों के देश में आई गई आगे तो देखी पवाई खुला नीला गगन, नीचे मैं थी मगन वहीं … Continue reading →

१९६५ – चाँद और सूरज – तेरी याद ना दिल से जा सकी | 1965 – Chand Aur Suraj – teri yaad dil se na ja saki

तेरी याद ना दिल से जा सकी आती थी नींद कभी-कभी आज तो वो भी ना आ सकी तारों के साए में कितने सपने देखे थे मिलके हमने-तुमने रूठ गए तुम सपने भी रूठे उनको भी मैं ना मना सकी तेरी याद ना दिल से … रातें वो रातें ना, दिन वो दिन हैं मंज़िल … Continue reading →

१९६५ – चाँद और सूरज – बाग़ में कली खिली | 1965 – Chand Aur Suraj – baag mein kali khili

बाग़ में कली खिली, बगिया महकी पर हाय रे, अभी इधर भँवरा नहीं आया राह में नज़र बिछी बहकी-बहकी और बेवजह घड़ी-घड़ी ये दिल घबराया हाय रे, क्यूँ न आया, क्यूँ न आया, क्यूँ न आया बैठे हैं हम तो अरमाँ जगाए सीने में लाखों तूफ़ान छुपाए मत पूछो मन को कैसे मनाया बाग़ में … Continue reading →

१९५१ – आवारा – एक दो तीन आजा मौसम है रंगीन | 1951 – Awara – ek do teen aa ja mausam hai rangeen

एक दो तीन, आजा मौसम है रंगीन, आजा एक दो तीन, आजा मौसम है रंगीन रात को छुप-छुपके मिलना दुनिया समझे पाप रे एक दो तीन, आजा मौसम है रंगीन ये मदमस्त जवानी है, तेरे लिए ये दीवानी है डूबके इस गहराई में, देख ले कितना पानी है एक दो तीन, आजा मौसम है रंगीन … Continue reading →

१९५१ – आवारा – घर आया मेरा परदेसी | 1951 – Awara – ghar aaya mera pardesi

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय घर आया मेरा परदेसी प्यास बुझी मेरी अँखियन की तू मेरे मन का मोती है इन नैनन की ज्योति है याद है मेरे बचपन की घर आया मेरा परदेसी अब दिल मत तोड़के मत जाना रोती छोड़के मत जाना क़सम तुझे मेरे अँसुवन की घर आया मेरा परदेसी OM … Continue reading →

१९५१ – आवारा – जुलम सहे भारी जनक दुलारी | 1951 – Awara – julam sahe bhaari janak dulari

पतिव्रता सीतामाई को तूने दिया बनवास क्यूँ ना फटा धरती का कलेजा क्यूँ ना फटा आकाश जुलम सहे भारी, जनकदुलारी जनकदुलारी, राम की प्यारी फिरे है मारी-मारी, जनकदुलारी जुलम सहे भारी, जनकदुलारी गगनमहल का राजा देखो कैसा खेल दिखाए सीप से मोती, गंदले जल में सुंदर कँवल खिलाए अजब तेरी लीला है गिरधारी pativrataa siitaamaa_ii … Continue reading →

१९५१ – आवारा – नैय्या तेरी मँझधार | 1951 – Awara – naiyya teri majhdhaar

नैय्या तेरी मँझधार, होशियार, होशियार सूझे आर ना पार, होशियार, होशियार नैय्या तेरी मँझधार, होशियार, होशियार डर कैसा रे खुला हुआ आसमान सँभलके माँझी, सँभल कि तेरी नाव में है तूफ़ान गहरी चंचल धार, होशियार, होशियार नैय्या तेरी मँझधार, होशियार, होशियार काठ का टुकड़ा बह जाता है, लोहा डूबके रह जाता है ग्यानी सोच विचार, … Continue reading →

१९५१ – आवारा – तेरे बिना आग ये चाँदनी | 1951 – Awara – tere bina aag ye chandani

तेरे बिना आग ये चाँदनी, तू आजा तेरे बिना बेसुरी बाँसरी, ये मेरी ज़िंदगी, दर्द की रागिनी तू आजा, तू आजा ये नहीं है, ये नहीं है ज़िंदगी, ज़िंदगी ये नहीं ज़िंदगी ज़िंदगी की ये चिता में ज़िंदा जल रहा हूँ, हाय साँस के ये आग के ये तीर चीरते हैं आरपार, आरपार मुझको ये … Continue reading →