Songs of Shailendra::
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Lyrics

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१९५२ – दाग़ – लागे जब से नैन लागे | 1952 – Daag – laage jab se nain laage

लागे, जब से नैन लागे दिल तो गया, क्या जाने उल्फ़त में क्या होगा आगे जब से नैन लागे हम उनके घर आके शर्मा रहे हैं क्यूँ खुल गए भेद पछता रहे हैं बँधने लगे लो मोहब्बत के धागे जब से नैन लागे, हो जब से नैन लागे … सपने भी उनके, ये निंदिया भी … Continue reading

१९५९ – दीप जलता रहे – एक दौर नया दुनिया में शुरु हुआ | 1959 – Deep Jalta Rahe – ek daur naya duniya mein shuru hua

एक दौर नया दुनिया में शुरु बच्चों के क़दम से होगा बदनाम हो जिससे देश अपना, वो काम ना हमसे होगा ये राम और श्रीकृष्ण की धरती, धरती बुद्ध महान की युग-युग से इस मिट्टी ने अगवाई की इन्सान की ये देश है अर्जुन-भीम का, राणा प्रताप-से वीर का कुछ करके दिखाएँगे हम भी, कुछ … Continue reading

१९५९ – दीप जलता रहे – डाली पे बैठी थी दस चिड़ियाँ | 1959 – Deep Jalta Rahe – daali pe baithi thi das chidiyan

डाली पे बैठी थीं दस चिड़ियाँ एक उड़ गई फुर्र से न जाने कहाँ तो रह गई डाली पे कितनी चिड़ियाँ, कितनी चिड़ियाँ नौ चिड़ियाँ, हाँ नौ चिड़ियाँ उड़ते-उड़ते चिड़िया पहुँची कमला नेहरू पार्क में जहाँ पे हँसती थी हर क्यारी फूलोंवाली फ़्राक में कमला नेहरू पार्क की निराली शान-बान बच्चो तुमने देखा है वो … Continue reading

१९५२ – दाग़ – प्रीत ये कैसी बोल री दुनिया | 1952 – Daag – preet ye kaisi bol ri duniya

प्रीत ये कैसी बोल री दुनिया, प्रीत ये कसी बोल री दुनिया, प्रीत ये कैसी बोल धूल में मन का हीरा रोवे, कोई न पूछे मोल दुनिया, बोल री दुनिया बोल देखूँ मैं इक सुंदर सपना, ढूँढ़ूँ तारों में घर अपना अँधी क़िस्मत तोड़ रही है ये सपने अनमोल दुनिया, प्रीत ये कैसी बोल डूब … Continue reading

१९५५ – चोरी चोरी – ये रात भीगी-भीगी | 1955 – Chori Chori – ye raat bheegi bheegi

ये रात भीगी-भीगी, ये मस्त फ़िज़ाएँ, उठा धीरे-धीरे वो चाँद प्यारा-प्यारा क्यूँ आग-सी लगाके गुमसुम है चाँदनी, सोने भी नहीं देता मौसम का ये इशारा इठलाती हवा, नीलम-सा गगन, कलियों पे ये बेहोशी की नमी ऐसे में भी क्यूँ बेचैन है दिल, जीवन में न जाने क्या है कमी क्यूँ आग-सी लगाके गुमसुम है चाँदनी, … Continue reading

१९५७ – कॉफ़ी हाउस – जवाँ ये ज़िंदगी ये प्यार का समाँ | 1957 – Coffee House – jawan ye zindagi ye pyar ka sama

जवाँ ये ज़िंदगी, ये प्यार का समाँ ओ मेरे दिलबर, कहाँ है तू कहाँ पलकें बिछाए मैं खड़ी हूँ कबसे अरमान जगाए मैं खड़ी हूँ कबसे ये आग-सी लगाए खड़ी हूँ कबसे जवाँ ये ज़िंदगी … ताज के लिए ना तलवार के लिए मेरा दिल है मेरे दिलदार के लिए जान-ए-मन जाँ निसार तेरे प्यार … Continue reading

१९५२ – दाग़ – देखो आया ये कैसा ज़माना | 1952 – Daag – dekho aaya ye kaisa zamana

देखो आया ये कैसा ज़माना ये दुनिया अजायबखाना, रे देखो आया ये कैसा ज़माना काली घोडी पे बैठके, कल हम गए बजार तेल तो देखा था पहले से, और देखी तेल की धार जो कुछ देखा, देखके हमको, याद आए श्रीरामा, रे देखो आया ये कैसा ज़माना … चोर की चौकीदारी देखी, और अँधों की … Continue reading

१९५५ – चोरी चोरी – तुम अरबों का हेर-फेर करनेवाले | 1955 – Chori Chori – tum arbon ka her pher karnewale

तुम अरबों का हेर-फेर करनेवाले राम-जी सवा लाख की लाटरी भेजो अपने भी नाम जी पैसे-पैसे को जवानी मेरी तरसे सोते-सोते उठ जाऊँ बिस्तर से कब जाएगी ग़रीबी मेरे घर से तुम अरबों का हेर-फेर करनेवाले … कैसी प्यारी है ख़बर अख़बारों में लक्ष्मीदेवी होंगी अपने इशारों में होगा बंगला हमारा भी सितारों में तुम … Continue reading

१९५५ – चोरी चोरी – मनभावन के घर जाए गोरी | 1955 – Chori Chori – manbhawan ke ghar jaye gori

मनभावन के घर जाए गोरी घूँघट में शरमाए गोरी बँधी रहे ये प्यार की डोरी हमें ना भुलाना, हमें ना भुलाना बचपन के दिन खेल गँवाए, आई जवानी तो बालम आए तेरे आँगन बजे बधाई गोरी, क्यूँ नैना छलकाए गोरी बँधी रहे ये प्यार की डोरी हमें ना भुलाना, हमें ना भुलाना इस दुनिया की … Continue reading

१९६७ – छोटी-सी मुलाक़ात – कल नहीं पाए जिया मोरे पिया तुम बिन | 1967 – Chhoti Si Mulaqat – kal nahin paye jiya o more piya tum bin

कल नहीं पाए जिया, मोरे पिया तुम बिन कल नहीं पाए जिया, मोरे पिया सज सोलह-सिंगार खड़ी मैं पंथ निहारूँ घड़ी-घड़ी मैं सूना सब जग रसिया, मोरे पिया तुम बिन कल नहीं पाए जिया, मोरे पिया आँगन जाऊँ, अटारी जाऊँ साँझ भए से आस लगाऊँ जलूँ जैसे जले दिया, मोरे पिया तुम बिन कल नहीं … Continue reading