Songs of Shailendra::
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Lyrics

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१९५५ – श्री ४२० – मेरा जूता है जापानी १ | 1955 – Shree 420 – mera joota hai japani

मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंग्लिस्तानी सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी मेरा जूता है जापानी निकल पड़े हैं खुल्ली सड़क पर, अपना सीना ताने मंज़िल कहाँ, कहाँ रुकना है, उपरवाला जाने बढ़ते जाएँ हम सैलानी, जैसे एक दरिया तूफ़ानी सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – प्यार हुआ इक़रार हुआ है | 1955 – Shree 420 – pyar hua iqrar hua hai

प्यार हुआ इक़रार हुआ है, प्यार से फिर क्यूँ डरता है दिल कहता है दिल, रस्ता मुश्किल, मालूम नहीं है कहाँ मंज़िल प्यार हुआ इक़रार हुआ है, प्यार से फिर क्यूँ डरता है दिल कहो कि अपनी प्रीत का गीत न बदलेगा कभी तुम भी कहो इस राह का मीत न बदलेगा कभी प्यार जो … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – रमैया वस्तावैया | 1955 – Shree 420 – ramaiyya vastavaiyya

रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया मैंने दिल तुझको दिया, मैंने दिल तुझको दिया ओ रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया नैनों में थी प्यार की रौशनी तेरी आँखों में ये दुनियादारी न थी तू और था, तेरा दिल और था तेरे मन में ये मीठी कटारी न थी मैं जो दुख पाऊँ तो क्या, आज पछताऊँ तो क्या … Continue reading

१९६१ – ससुराल – सता ले ऐ जहाँ | 1961 – Sasural – sata le ae jahan

सता ले ऐ जहाँ, न खोलेंगे ज़ुबाँ सितम तेरे कभी तो बेअसर हो जाएँगे पुकारो लाख तुम, न फिर लौटेंगे हम कि हम भी राह की इस धूल में खो जाएँगे सता ले ऐ जहाँ जलन दिल की तो कहती है, कि मैं उठ जाऊँ महफ़िल से मगर उम्मीद दामन को मेरे छोड़ेगी मुश्किल से … Continue reading

१९६१ – ससुराल – ये अलबेला तौर ना | 1961 – Sasural – ye albela taur na dekha

ये अलबेला तौर न देखा तुमसा कोई और ना देखा हुस्न का ये जौर ना देखा वल्लाह, यार लुट गए हम तो नज़र मिलाके तुम हमको अगर इस हाल में पहचानते तो हम आपकी बाँकी नज़र को मानते मेरा फ़साना, पता या ठिकाना, अगर पूछते जानते ये अलबेला तौर न देखा … है जीवन का … Continue reading

१९५५ – सीमा – कहाँ जा रहा तू ऐ जानेवाले | 1955 – Seema – kahan ja raha hai tu ae janewale

कहाँ जा रहा है तू, ऐ जानेवाले अँधेरा है मन का, दिया तो जला ले कहाँ जा रहा है तू, ऐ जानेवाले कहाँ जा रहा है ये जीवन-सफ़र एक अँधा सफ़र है बहकना है मुमकिन, भटकने का डर है सँभलता नहीं दिल किसीके सँभाले कहाँ जा रहा है तू, ऐ जानेवाले कहाँ जा रहा है … Continue reading

१९५५ – सीमा – मनमोहना बड़े झूठे | 1955 – Seema – manmohana bade jhoothe

मनमोहना बड़े झूठे हारके हार नहीं मानें मनमोहना बने थे खिलाड़ी पिया, निकले अनाड़ी मोसे बेईमानी करी, मुझसे ही रूठे मनमोहना बड़े झूठे तुम्हरी ये बांसी कान्हा, बनी गलफाँसी तान सुनाके मेरा तन-मन लूटे मनमोहना बड़े झूठे manamohanaa ba.De jhuuThe haarake haar nahii.n maane.n manamohanaa bane the khilaa.Dii piyaa, nikale anaa.Dii mose be_iimaanii karii, mujhase … Continue reading

१९५३ – शिकस्त – बदले रंग जहान के | 1953 – Shikast – badle rang jahan ke

बुझ गए आशा के दिये, मन अँधियारा होए लुट गए मोती लाज के, सीप बिचारी रोए सब दुश्मन इस जान के, बदले रंग जहान के बदले रंग जहान के देख अँधेरी रात, जियरवा काँपे डर से घूमे संकट का बादरवा, गरजे बरसे जाल बिछे तूफ़ान के, बदले रंग जहान के बदले रंग जहान के होंठ … Continue reading

१९५३ – शिकस्त – हम तो हैं खेल-खिलौने | 1953 – Shikast – hum to hain khel khilaune

हम कठपुतले काठ के, हमें तू नाच नचाए ऊँचे आसन बैठके, अपना दिल बहलाए हम तो हैं खेल-खिलौने, खेलो जी-भरके राम दुख या सुख जो भी चाहो, ले लो जी-भरके राम खेलो जी-भरके राम हर पल चंचल मन नाचे, हर पल आशा दीवानी लेकिन हर सपना टूटे, रह जाए दर्द निशानी गुपचुप करनी करते हो, … Continue reading

१९५३ – शिकस्त – जब-जब फूल खिले | 1953 – Shikast – jab jab phool khile

जब-जब फूल खिले, तुझे याद किया हमने जब-जब फूल खिले देख अकेला हमें, हमें घेर लिया ग़म ने जब-जब फूल खिले मन को मैंने लाख मनाया पर अब तो है वो भी पराया ज़ख्म किए नासूर, तेरी याद के मरहम ने जब-जब फूल खिले मिलने के हैं लाख बहाने लेकिन मन का मीत न माने … Continue reading