Songs of Shailendra::
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1960s

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१९६७ – दीवाना – हम तो जाते अपने गाम | 1967 – Diwana – hum to jate apne gaam

मुबारक देने आए थे, मुबारक देके जाते हैं मिला है बहुत कुछ, सीने में जो हम लेके जाते हैं हम तो जाते अपने गाम, अपनी राम-राम-राम अपनी राम-राम-राम, सबको राम-राम-राम हम तो जाते अपने गाम, अपनी राम-राम-राम सबको राम-राम-राम कभी जो कह ना पाए बात, वो होंठों पे अब आई अदालत उठ चुकी है, अब … Continue reading →

१९६७ – दीवाना – पते की बात कहेगा कहेगा जब भी दीवाना | 1967 – Diwana – pate ki baat kahega kahega jab bhi

पते की बात कहेगा, कहेगा जब भी दीवाना मेरी सूरत पे न जाना, मेरी सूरत पे न जाना पते की बात कहेगा, कहेगा जब भी दीवाना वहाँ कुछ देर है प्यारे, नहीं अँधेर है प्यारे जो तुझको ना दिखाई दे, नज़र का फेर है प्यारे तू बहकावे में न आना, है उसका सब जग जाना … Continue reading →

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – खोया-खोया चँदा खोए-खोए तारे | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – khoya khoya chanda khoye khoe tare

खोया-खोया चँदा, खोए-खोए तारे सो गए, तू भी सो जा चाँद हमारे खोया-खोया चँदा, खोए-खोए तारे लेके जादू की छड़ी, आई सपनों की परी रूपनगरी में तुझे छोड़ आएगी अभी है वो सपनों का जहाँ, एक मेला है वहाँ देस-परदेस के बच्चे चले वहाँ नीले आकाश के गंगा के किनारे खोया-खोया चँदा … झूला चाँदी … Continue reading →

१९६७ – दीवाना – तुमको सनम पुकारके चल दें न दिन बहार के | 1967 – Diwana – tum ko sanam pukar ke

तुमको सनम पुकारके, चल दें न दिन बहार के आ जाओ, तड़पते हैं हम आ भी जाओ, तड़पते हैं हम तुम बिन तो इस जहाँ में कोई नहीं हमारा बस एक आस तुमसे, एक आसरा तुम्हारा तुमको सनम पुकारके … ये बात अपने दिल की, हम कह न पाए तुमसे लेकिन छुप ही क्या है, … Continue reading →

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – पथभूला एक आया मुसाफ़िर | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – pathbhoola ek aaya musafir

पथभूला एक आया मुसफ़िर, लेके मेरा मन दूर चला बिखरे सपने, रह गईं यादें, रात से पहले चाँद ढला पथभूला कोई न समझे, कोई न जाने, दिल की लगी है क्या लाख छुपाऊँ, छुप न सके ये प्रेम का रोग बुरा पथभूला एक आया मुसफ़िर, लेके मेरा मन दूर चला पथभूला दिल कहता है रोक … Continue reading →

१९६७ – छोटी-सी मुलाक़ात – कल नहीं पाए जिया मोरे पिया तुम बिन | 1967 – Chhoti Si Mulaqat – kal nahin paye jiya o more piya tum bin

कल नहीं पाए जिया, मोरे पिया तुम बिन कल नहीं पाए जिया, मोरे पिया सज सोलह-सिंगार खड़ी मैं पंथ निहारूँ घड़ी-घड़ी मैं सूना सब जग रसिया, मोरे पिया तुम बिन कल नहीं पाए जिया, मोरे पिया आँगन जाऊँ, अटारी जाऊँ साँझ भए से आस लगाऊँ जलूँ जैसे जले दिया, मोरे पिया तुम बिन कल नहीं … Continue reading →

१९६७ – छोटी-सी मुलाक़ात – मत जा मत जा मेरे बचपन | 1967 – Chhoti Si Mulaqat – mat ja mat ja mere bachpan

मत जा मत जा मत जा, मेरे बचपन नादाँ बचपन ने कहा मुझसे, कुछ रोज़ के हम मेहमाँ जबसे ये रुत मतवाली आई है मेरे आँगन रहते हैं खिंचे-से नैना, रूठा रहता है मन अपने रूठे मन को मैं लेकर जाऊँ कहाँ बचपन ने कहा मुझसे, कुछ रोज़ के हम मेहमाँ मत जा मत जा … Continue reading →

१९६७ – छोटी-सी मुलाक़ात – जीवन के दो राहे पर खड़े सोचते हैं हम | 1967 – Chhoti Si Mulaqat – jeewan ke do rahe pe jhade sochte hain hum

जीवन के दो-राहे पे खड़े, सोचते हैं हम जाएँ तो किधर जाएँ ताने है दिल इधर को तो, खींचें उधर क़दम जाएँ तो किधर जाएँ जीवन के दो-राहे पे खड़े, सोचते हैं हम हर मोड़ पे देता है ये संसार दुहाई हर गाम पे देता है मेरा प्यार दुहाई इस रास्ते में मंदिर हैतो उस … Continue reading →

१९६१ – चार दीवारी – गोरी बाबुल का घरवा | 1961 – Char Diwari – gori babul ka gharwa

गोरी, बाबुल का घरवा अब है बिदेसवा साजन के चरणों में घर है तेरा ओ गोरी, चार दीवारी, अंगना, अटारी यही तेरी दुनिया, ये जग है तेरा गोरी, बाबुल का घरवा आई है तू, बगिया में जैसे बहार आई रे आँचल में प्यार, अँखियों में सपने हज़ार लाई रे बड़ी गहरी नदिया के पार आई … Continue reading →

१९६५ – छोटे नवाब – घर आजा घिर आए बदरा | 1965 – Chhote Nawab – ghar aa ja ghir aaye

घर आजा घिर आए बदरा साँवरिया मोरा जिया धक-धक रे, चमके बिजुरिया घर आजा घिर आए सूना-सूना घर मोहे डसने को आए रे खिड़की पे बैठे-बैठे सारी रैन जाए रे टप-टीप सुनत मैं तो भई रे बाँवरिया घर आजा घिर आए कसमस जियरा, कसक मोरी दूनी रे प्यासी-प्यासी अँखियों की गलियाँ हैं सूनी रे जाने … Continue reading →