Songs of Shailendra::
archives

1950s

This category contains 315 posts

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – होंठों पे सच्चाई रहती है | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – honthon pe sachchai rehti hai

होंठों पे सच्चाई रहती है, जहँ दिल में सफ़ाई रहती है हम उस देश के वासी हैं, जिस देश में गंगा बहती है मेहमाँ जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता है ज़्यादा की नहीं लालच हमको, थोड़े में गुज़ारा होता है बच्चों के लिए जो धरती माँ, सदियों से सभी कुछ सहती … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – ओ बसंती पवन पागल | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – o basanti pawan pagal

ओ बसंती पवन पागल, ना जा रे ना जा रोको कोई ओ बसंती पवन पागल बनके पत्थर हम पड़े थे, सूनी-सूनी राह में जी उठे हम जबसे तेरी बाँह आई बाँह में छीनकर नैनों से काजल, ना जा रे ना जा रोको कोई ओ बसंती पवन पागल… याद कर, तूने कहा था, प्यार से संसार … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – begani shaadi mein abdulla deewana

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना ऐसे मनमौजी को मुश्किल है समझाना है ना! दुल्हन बनूँगी मैं, डोली चढ़ूँगी मैं दूर कहीं बालम के दिल रहूँगी मैं तुम तो पराए हो, यूँ ही ललचाए हो जाने किस दुनिया से, जाने क्यूँ आए हो बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना ऐसे मनमौजी को मुश्किल है समझाना लहराती आऊँ … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – आ अब लौट चलें | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – aa ab laut chalein

आ अब लौट चलें नैन बिछाए, बाँहें पसारे, तुझको पुकारे देश तेरा आ जा रे, आ जा रे सहज है सीधी राह पे चलना, देखके उलझन बचके निकलना कोई ये चाहे माने न माने, बहुत है मुश्किल गिरके सँभलना आ अब लौट चलें… आँख हमारी मंज़िल पर है, दिल में ख़ुशी की मस्त लहर है … Continue reading →

१९५६ – हलाकू – अजी चले आओ, तुम्हें आँखों ने दिल में बुलाया | 1956 – Halaku – aji chale aao, tumhein aankhon ne dil mein bulaya

अजी चले आओ अजी चले आओ, तुम्हें आँखों ने दिल में बुलाया अब तो समझ जाओ अब तो समझ जाओ, क्यूँ निगाहों ने पर्दा गिराया अजी चले आओ दिल में उठती हैं कैसी उमंगें, तुमसे कानों में कहना पड़ेगा शर्त सुन लो मगर मेरे दिलबर, आके दिल में ही रहना पड़ेगा ज़रा मुस्कुराओ ज़रा मुस्कुराओ, … Continue reading →

१९५६ – हलाकू – आजा कि इंतज़ार में | 1956 – Halaku – aa ja ki intezar mein

आजा कि इंतज़ार में, जाने को है बहार भी तेरे बग़ैर ज़िंदगी, दर्द बनके रह गई अरमाँ लिए बैठे हैं हम, सीने में है तेरा-ही ग़म तेरे दिल से प्यार की वो तड़प किधर गई आजा कि इंतज़ार में… दिल की सदा पे ऐ सनम, बढ़ते गए मेरे क़दम अब तो चाहे जो भी हो, … Continue reading →

१९६० – एक फूल चार काँटे – मतवाली नार ठुमक-ठुमक | 1960 – Ek Phool Char Kaante – matwali naar thumak thumak chali jaye

मतवाली नार ठुमक-ठुमक चली जाए इन क़दमों पे किसका जिया ना झुक जाए मतवाली नार ठुमक-ठुमक चली जाए फूल बदन मुखड़ा यूँ दमके बादल में ज्यूँ बिजली चमके गीत सुनाके तू छम-छम के ललचाए, छुप जाए, हाय हाय मतवाली नार ठुमक-ठुमक … ये चंचल कजरारी आँखें ये चितचोर शिकारी आँखें गई दिल चीर कटारी आँखें … Continue reading →

१९६० – एक फूल चार काँटे – सोच रही थी कहूँ ना कहूँ | 1960 – Ek Phool Char Kaante – soch rahi thi kahoon na kahoon

सोच रही थी कहूँ ना कहूँ, पर आज कहूँगी मेरे सनम तूने ले तो लिया दिल याद रहे मेरा जीना है मुश्किल तेरे बिना, तेरे बिना क्या मैं कहूँ सजना, मुझको हुआ क्या है मुझमें बसे हो तुम, तुमसे छुपा क्या है तुम ही सुनो अब कहता है क्या दिल याद रहे मेरा जीना है … Continue reading →

१९६० – एक फूल चार काँटे – सँभल के करना जो भी करना | 1960 – Ek Phool Char Kaante – sambhal ke karna jo bhi karna

सँभलके करना, जो भी करना, नाज़ुक हाथोंवाले नाज़ुक हाथोंवाले लचक ना जाए नरम कलाई, पड़ ना जाएँ छाले पड़ ना जाएँ छाले सँभलके करना, जो भी करना हटाके पर्दे निकल पड़े हो, मुक़ाबला क्या तुम्हीं बड़े हो मगर ऐ जानाँ इधर तो देखो, हम भी हैं दिलवाले हम भी हैं दिलवाले सँभलके करना, जो भी … Continue reading →

१९५५ – श्री ४२० – शाम गई रात आई कि बलम आ जा | 1955 – Shree 420 – sham gayi raat aayi ki balam aa ja

शाम गई रात आई, कि बलम आजा तारों की बरात आई, कि बलम आजा ओ बलम आजा, अब तो सनम आजा शाम गई रात आई, कि बलम आजा रात और दिन के मिलन की घड़ी में, ठण्डी-ठण्डी सावन की झड़ी में दो दिलों ने जो बाँधे थे बँधन, उनमें खोई खड़ी मैं, खड़ी मैं याद … Continue reading →