Songs of Shailendra::
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1950s

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१९५६ – पटरानी – ना जाने तुम कौन मेरी आँखों में समा गए | 1956 – Patrani – na jaane tum kaun meri ankhon mein sama gaye

ना जाने तुम कौन मेरी आँखों में समा गए सपनों के मेहमान बनके मेरे दिल में आ गए धीरे-धीरे मेरी दुनिया पे छा गए ना जाने तुम कौन मेरी आँखों में समा गए सब ये पूछेँ बलम का क्या नाम है जिसके तुम चन्द्रमा कौन-सा धाम है मैं न कुछ कह सकूँ, प्यार बदनाम है … Continue reading →

१९५६ – पटरानी – अरे कोई जाओ री पिया को बुलाओ री | 1956 – Patrani – are koi jaao ri piya ko bulaao ri

अरे कोई जाओ री, पिया को बुलाओ री गोरी की पायल बाजे छुम छननन छुम जैसे-जैसे रात चढ़े, अँखियों की प्यास बढ़े गोरी की पायल कहे छुम छननन छुम आज की रात साजन के साथ गुपचुप होंगी भेद की बतियाँ नैनों में नैना हाथों में हाथ रूप धरेंगी मेरे मन की मुरतियाँ अरे कोई जाओ … Continue reading →

१९५३ – नया घर – ये समाँ और हम-तुम | 1953 – Naya Ghar – ye samaan aur hum tum

छुम छननन छुम छुम, ये समाँ और हम-तुम मस्त नज़र पे दिल लुटेंगे चुपके-चुपके गुल खिलेंगे, और मचेगी धूम छुम छननन छुम छुम तेरे दिल की तमन्ना आज फिर उठी है मौज बनके नाचे बहारों की परी तेरे दर पे बन-ठनके छुम छननन छुम छुम … क्या रंग है प्यार के फूल का, दिल खोलके … Continue reading →

१९५३ – नया घर – उन्हें तू भूल जा ऐ दिल | 1953 – Naya Ghar – unhein tu bhool ja ae dil

उन्हें तू भूल जा ऐ दिल, तड़पने से भी क्या हासिल नज़ारे कर गए जादू, निगाहें दे गईं धोखा उठे तूफ़ान कुछ ऐसे कि डूबे प्यार के साहिल उन्हें तू भूल जा ऐ दिल, तड़पने से भी क्या हासिल हज़ारों आरज़ूओं से बसाया जिसको पहलू में जिसे समझे थे हम दिलबर, वो निकला संगदिल क़ातिल … Continue reading →

१९५३ – नया घर – जवाँ है जहाँ झूम उठी हर नज़र | 1953 – Naya Ghar – jawaan hai jahaan jhoom uthi har nazar

जवाँ है जहाँ झूम उठी हर नज़र मैं हूँ कि है ज़िंदगी ज़हर नज़र ढूँढ़ती है न जाने किसे ये अरमाँ बुलाते हैं जाने किसे हुई मुद्दतें सूना-सून है घर मैं हूँ कि है ज़िंदगी ज़हर ओ हाय तेरी बेवफ़ाई मुझे मौत भी न आई मेरी हर दुआ हर सदा बेअसर मैं हूँ कि है … Continue reading →

१९५३ – नया घर – जा जा जा रे रन्ज-ओ-ग़म के अँधेरे | 1953 – Naya Ghar – ja ja ja re ranj-o-gham ke andhere

जा जा जा रे जा रे जा रे, रन्ज-ओ-ग़म के अँधेरे तू जा तेरा-मेरा साथ क्या रे, तू मेरे दिल की दुनिया से जा जा जा जा रे जा रे जा उम्मीदों ने छेड़ा ख़ुशी का ये तराना निगाहों ने सीखा है फिर से मुस्कुराना जा जा जा रे … मोहबत की ऐसी घड़ी आ … Continue reading →

१९५३ – औरत – दर्द-ए-उल्फ़त हाय दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ | 1953 – Aurat – dard-e-ulfat chhupaun kahan

दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ कहाँ दिल की दुनिया बसाऊँ कहाँ दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ कहाँ चुपके-से वो मेरे दिल में समाए उन्हें लेके जाऊँ कहाँ दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ कहाँ चाहत है नाज़ुक, ज़ालिम है ज़माना मैं बचके भी जाऊँ कहाँ दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ कहाँ उन्हें देख शर्माके पूछा नज़र ने वो आए, बिठाऊँ कहाँ दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ कहाँ dard-e-ulfat chhupaa_uu.N kahaa.N dil … Continue reading →

१९५३ – औरत – दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा | 1953 – Aurat – dard-e-jigar thehar zara

दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा, दम तो मुझे लेने दे जिसने मिटाया है मुझे, उसको दुआ देने दे दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा दिल की लगी क्या है जान लूँ तो बहुत अच्छा हो मैं जो घुट-घुटके जान दूँ तो बहुत अच्छा हो कल जहाँ बसाया था, आज मिटा लेने दे दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा मेरी बर्बाद मोहब्बत न कर … Continue reading →

१९५६ – परिवार – झिरझिर-झिरझिर बदरवा बरसें हो कारे-कारे | 1956 – Parivar – jhirjhir jhirjhir badarwa barsen ho kare kare

झिरझिर-झिरझिर बदरवा बरसें हो कारे-कारे सोए अरमान जागे, कई तूफ़ान जागे माने ना मन मोरा सजना बिना झिरझिर-झिरझिर बदरवा बरसें हो कारे-कारे, झिरझिर-झिरझिर आजा कि तोहे मेरी प्रीत पुकारे तुझको ही आज तेरा गीत पुकारे याद आईं बीती बातें, तुमसे मिलन की रातें काहे को भूले मोहे अपना बना झिरझिर-झिरझिर बदरवा बरसें हो कारे-कारे झिरझिर-झिरझिर … Continue reading →

१९५२ – परबत – बेरहम, मार डालेगा मुझको तेरा ग़म | 1952 – Parbat – beraham maar dalega mujhako tera gham

बेरहम, मार डालेगा मुझको तेरा ग़म अब तो आजा, मेरे बालम, अब तो आजा ये समाँ, ओ सनम, बेबसी का ये आलम अब तो आजा, मेरे बालम, अब तो आजा हमने माना हमारा क़सूर है देके दिल दर्द होता ज़रूर है दर्द में मुस्कुराना सिखा जा, आजा अब तो आजा, मेरे बालम, अब तो आजा … Continue reading →