Songs of Shailendra::
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1950s

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१९५३ – आग़ोश – मिल-जुल के काटो लोगो ग़रीबी के फंदे | 1953 – Aagosh – miljul ke kaato logo garibi ke phande

मिलजुलके काटो ग़रीबी के फंदे मिलजुलके काटो रे लोगो, दुख-सुख बाँटो रे बड़ी दयावान भाई बड़ी मेहेरबान है हम सब पे ये धरतीमाता, धरतीमाता सोने की खान कहीं गेहूं कहीं धान रे हम सबकी ये अन्नदाता, धरतीमाता फिर भी आसमाँ के तले, काहे भूख-प्यास पले दुख-सुख बाँटो रे मिलजुलके काटो … जीवन के सागर में … Continue reading

१९५३ – आग़ोश – बाँसुरिया काहे बजाई | 1953 – Aagosh – baansuriya kaahe bajaai

बाँसुरिया काहे बजाई, बिन सुने रहा नहीं जाए रे मीठी नज़र काहे मिलाई, बिन देखे रहा नहीं जाए रे बाँसुरिया काहे बजाई, बिन सुने रहा नहीं जाए रे जाने-अनजाने जब मुख पे किसीके आए तेरा नाम सरसे सरक जाए चुनरी, सहेली करे बदनाम होवे रे हमरी जगतहँसाई, रे कान्हा बाँसुरिया काहे बजाई … हँस-हँस जादू … Continue reading

१९५३ – आग़ोश – हो धीरे-धीरे चढ़ गया नदी में पानी | 1953 – Aagosh – ho dheere dheere chadh gaya nadiya mein paani

हो धीरे-धीरे चढ़ गया नदी में पानी हो धीरे-धीरे कोई कहे तूफ़ान उठा, कोई कहे रे आई जवानी हो धीरे-धीरे चढ़ गया नदी में पानी हो धीरे-धीरे दिल में बैठा कोई दिल की धड़कन गिनता जाए मेरे मन के भेद चुराकर अपने भेद छुपाए जो-जो मेरी प्रीत बढ़े, मैं होती जाऊँ दीवानी हो धीरे-धीरे चढ़ … Continue reading

१९५३ – आग़ोश – आग छिड़क गई चाँदनी | 1953 – Aagosh – aag chhidak gai chandani

आग छिड़क गई चाँदनी मेरे गोरे बदन पे, मेरे कोमल मन पे हाय, आज मैं जर गई, जर गई, जर गई रे लहरों के संग छम-छम नाचे किरनों की जोड़ियाँ धीरे-से कोई खींचे दिल के पर्दों की डोरियाँ झूमके क्या कहता है आसमाँ, न समझे मेरे साजना हाय, आज मैं जर गई, जर गई, जर … Continue reading

१९५७ – अब दिल्ली दूर नहीं – राम लीला | 1957 – Ab Dilli Door Nahin – raam leela

हमरे मनोरथ पूरे करना रघुपति राघव राजाराम रघुपति राघव राजाराम तुम चाहो तो पलभर में बन जाएँ अपने बिगड़े काम रघुपति राघव राजाराम रघुवर के गुण गावे रे, हम रघुवर के गुण गावे रे बोलो सियापति रामचंद्र की जय सोने के हिरन के पीछे गए, क्यूँ राम अभी तक आए नहीं नारी का मन कोमल … Continue reading

१९५७ – अब दिल्ली दूर नहीं – मालिक तेरे जहान में इतने बड़े जहान में | 1957 – Ab Dilli Door Nahin – maalik tere jahan mein itne bade jahan mein

मालिक तेरे जहाँ में, इतने बड़े जहाँ में कोई नहीं हमारा, कोई नहीं हमारा अब किसके द्वार जाऊँ, दुख में किसे बुलाऊँ सब कर गए किनारा, कोई नहीं हमारा मलिक तेरे जहाँ में इस हाल में भी देखो ठुकरा रही है दुनिया हम पर बनी तो हामसे कतरा रही है दुनिया ना आस ना दिलासा, … Continue reading

१९५७ – अब दिल्ली दूर नहीं – माता ओ माता | 1957 – Ab Dilli Door Nahin – mata o mata

माता ओ माता जो तू आज होती मुझे यूँ बिलखता अगर देखती तेरा दिल टूट जाता माता ओ माता मुझे चूमकर तूने एक दिन कहा था मेरे लाडले तू तो राजा बनेगा सदा प्यार की पालकी में चलेगा बे-आस बे-घर मैं फिरता हूँ दर-दर मुझे यूँ भटकता अगर देखती तेरा दिल टूट जाता माता ओ … Continue reading

१९५७ – अब दिल्ली दूर नहीं – ये चमन हमारा अपना है | 1957 – Ab Dilli Door Nahin – ye chaman hamara apna hai

ये चमन हमारा अपना है इस देश पे अपना राज है मत कहो कि सर पे टोपी है कहो सर पे हमारे ताज है ये चमन हमारा अपना है आती थी एक दीवाली, बरसों में कभी ख़ुशहाली अब तो हर एक वार एक त्योहार है, ये उभरता-सँवरता समाज है ये चमन हमारा अपना है … … Continue reading

१९५८ – अजी बस शुक्रिया – होने लगा ये दिल में दर्द कैसा | 1958 – Aji Bas Shukriya – hone laga ye dil mein dard kaisa

होने लगा ये दिल में दर्द कैसा ऐ यै यै यो, ऐ यै यै यो मीठा-मीठा किसीके प्यार के जैसा ऐ यै यै यो, ऐ यै यै यो कोई बताओ, कोई बताओ, कोई बताओ धक-धक धड़के ज़ोर-ज़ोर से चौँके लोग सारे दिल के शोर से क्यूँ न पूछें वो हमसे, ये दिल्लगी है क्या होने … Continue reading

१९५४ – अमानत – बाँकी अदाएँ देखना जी देखना | 1954 – Amaanat – baanki adayein dekhna ji dekhna

बाँकी अदाएँ, देखना जी देखना दिल ना चुराएँ, देखना जी कहने को भोली नज़र है मीठा-मीठा ये ज़हर है धोखा ना खाना, दिल ना गँवाना देखो जी रहना बचके, बचके, बचके बाँकी अदाएँ … रूप को धूप दिखाने से आता है चोर बुलाने से दिल का ख़ज़ाना यूँ ना लुटाना देखो जी रहना बचके, बचके, … Continue reading