Songs of Shailendra::
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१९५५ – बसंत बहार – भयभंजना वंदना सुन हमारी | 1955 – Basant Bahar – bhaybhanjana vandana sun hamari

भय-भंजना वंदना सुन हमारी दरस तेरे माँगे ये तेरा पुजारी भय-भंजना गीतों के फूलों की माला बनाकर लाया हूँ दिल आरती में सजाकर ये साँसों की सरगम करूँ तेरे अर्पण तुझे और क्या दूँ, मैं ठहरा भिखारी दरस तेरे माँगे ये तेरा पुजारी भय-भंजना आजा मधुर स्वप्न-सी मुस्कुराती मन के बुझे दीप हँसकर जलाती जपे … Continue reading

१९५५ – बसंत बहार – जा-जा रे जा बालमवा | 1955 – Basant Bahar – ja ja re ja balamawa

जा जा रे जा बालमवा सौतन के संग रात बिताई काहे करत अब झूठी बतियाँ जा जा रे जा बालमवा ग़ैर के घर करी रात-जगाई मोसे कहे तेरे बिना नींद ना आई कैसो हरजाई दैय्या जा जा रे जा बालमवा … काँधे लगा लाई बिंदिया किसीकी जानूँ मैं चुराई तूने निंदिया किसीकी लाज ना आई … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – चिंचना पापुल छुई-मुई मुझे छू न लेना | 1958 – Baaghi Sipahi – chinchana papul chhui mui mujhe chhoo na lena

चिंचना पपुल, चिंचना पपुल, चिंचना पपुल छुईमुई मैं, छू न लेना, मुझे छू न लेना आँख से आँख मिली, जाम पे जाम चले, मुफ़्त बदनाम हुए हम तेरी ये शोख़ नज़र, ठण्डी आहों का असर, तुझे पहचान गए हम चिंचना पपुल, चिंचना पपुल, चिंचना पपुल लेके मेरा दिल जाँ न लेना, मुझे छू न लेना … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – मान भी ले ऐ दिल तू अपनी ये हार | 1958 – Baaghi Sipahi – maan bhi le ae dil too apni ye haar

मान भी ले ऐ दिल तू अपनी ये हार किया नहीं जाता, हो जाता है प्यार मान भी ले ऐ दिल नए रंग लेके उतरती है शाम, जाने क्यूँ बनती-सँवरती है शाम आ हम भी सपनों की दुनिया सँवार लें झूम-झूम गाए ये पागल बहार किया नहीं जाता, हो जाता है प्यार मान भी ले … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – ओ बेरहम, तेरे सितम हम पे होंगे कब तक | 1958 – Baaghi Sipahi – o beraham tere sitam hum pe honge kab tak

ओ बेरहम, तेरे सितम हमपे होंगे कब तक, देखेंगे हम ये रौशनी जलती रहे, जान भी जाए तो हमें होगा ना ग़म वो देख आँसुओं से ज़ख़्म धो रही है ज़िंदगी वो ख़ाक होके बीज नए बो रही ज़िंदगी सिवा ख़ुदाके और की ना होगी हमसे बंदगी ये कहके देख ज़ार-ज़ार रो रही है ज़िंदगी … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – समाँ ये प्यार का बहार के ये मेले | 1958 – Baaghi Sipahi – sama ye pyar ka bahar ke ye mele

समाँ ये प्यार का, बहार के ये मेले, ऐसे में निकलो ना झूमके अकेले दिन में भी आजकल डर है दिलों के चोर का दिल को जी हम तो उछालते चलेंगे, बहके निगाह तो सँभालते चलेंगे हमपे चलता नहीं जादू नज़र की डोर का समाँ ये प्यार का, बहार के ये मेले आप हमारे लिए … Continue reading

१९५१ – बादल – ऐ दिल न मुझसे छुपा | 1951 – Badal – ae dil na mujhse chhupa

ऐ दिल न मुझसे छुपा, सच बता क्या हुआ जाने भी दो दिलरुबा, जो हुआ सो हुआ तारे गिने रातभर, जाने कब याद में सो गई वो ख़्वाब था मदभरा, जिसमें बेहोश मैं खो गई कोई नींद में हमसे रूठके, हमको लूटके, चल दिया जाने भी दो दिलरुबा, जो हुआ सो हुआ ऐ दिल न … Continue reading

१९५१ – बादल – दो दिन के लिए मेहमान यहाँ | 1951 – Badal – do din ke liye mehman yahan

दो दिन के लिए मेहमान यहाँ मालूम नहीं मंज़िल है कहाँ अरमान-भरा दिल तो है मगर जो दिल से मिले वो दिल है कहाँ इक फूल जला, इक फूल खिला कुछ अपना लुटा, कुछ उनको मिला कैसे करें क़िस्मत से गिला रंगीन हर एक महफ़िल है कहाँ दो दिन के लिए … दुनिया में सवेरा … Continue reading

१९५१ – बादल – आज माने ना मोरा जिया | 1951 – Badal – aaj mane na mora jiya

आज माने ना मोरा जिया, ठुमक-ठुमक नाचे सावन का मौसम सुहाना देखो आए उमंगभरे रंगभरे बादल लाए ख़ुशी का ख़ज़ाना सावन का मौसम सुहाना उनका आना हुआ, ग़म का जाना हुआ कैसी बाँकी नज़र, दिल निशाना हुआ आज माने ना … मैं यहाँ हूँ मगर दिल तेरे पास है तू हो चाहे जहाँ, तू मेरे … Continue reading

१९५१ – बादल – उनसे प्यार हो गया | 1951 – Badal – unse pyar ho gaya

उनसे प्यार हो गया, उनसे प्यार हो गया दिल मेरा खो गया, दिल उनका खो गया दिल दिल से मिल गया उनसे प्यार हो गया दर्द मिटाए तूने तीर चुभाके आग बुझाई एक आग लगाके उनसे प्यार हो गया … नैनों से नैन मिले, बदले ज़माने समझनेवाले समझे, और ना जाने और ना जाने, कोई … Continue reading