Songs of Shailendra::
archives

Amarendra R N

Amarendra R N has written 570 posts for शैलेंद्र के गीत | Songs of Shailendra

१९५५ – मदभरे नैन – मन पंछी अलबेला | 1955 – Madbhare Nain – man panchhi albela

मन पंछी अलबेला, तारों की नगरी में जाए मत पूछो किसकी लाए खबरिया, मन पंछी अलबेला नई-नई पहचान है, उसका नाम ना जाना मैंने मैं कैसे कहूँ मेरा कौन साँवरिया मन पंछी अलबेला पाँव मेरे धरती पे, मेरी नज़र चाँद को चूमे मेरा आँचल उड़े हवाओं में, मेरा तन झूमे मन झूमे कैसी उलझी नजरिया … Continue reading

१९५९ – मधु – बता दो कोई कौन गली गयो श्याम १ | 1959 – Madhu – bata do koi kaun gali gayo shyam 1

बता दो कोई, कौन गली गए श्याम कौन गली गए श्याम बता दो कोई, कौन गली गए श्याम झूठा धीरज आस दिलाकर, अचक-अचानक बाँह छुड़ाकर गए वो, हम रह गए यहाँ, दो टूक कलेजा थाम कौन गली गए श्याम बता दो कोई, कौन गली गए श्याम पलछिन-मात ज़माने बीते, शरद-बसंत सुहाने बीते बार-बार झुक पड़े … Continue reading

१९५९ – मधु – किसीको ना बताऊँगी | 1959 – Madhu – kisi ko na bataoongi

किसीको ना बताऊँगी, हो चोरी-चोरी जो दिल में समाया, वो कौन है जिसके बिन सूनी मेरी अँखियाँ जैसे चँदा के बिन रतियाँ जिसकी मैं बनी हूँ रे छाया, वो कौन है किसीको ना बताऊँगी … मीठी बतियों से जो भरमाए मोहे जग से दूर बुलाए गीत जिसका पपीहे ने गाया, वो कौन है किसीको ना … Continue reading

१९५९ – मधु – बता दो कोई कौन गली गयो श्याम २ | 1959 – Madhu – bata do koi kaun gali gayo shyam 2

बता दो कोई, कौन गली गए श्याम कौन गली गए श्याम बता दो कोई, कौन गली गए श्याम झूठा धीरज आस दिलाकर, अचक-अचानक बाँह छुड़ाकर वो तो गए, हाय, रह गए यहाँ हम, हाय, कलेजा थाम कौन गली गए श्याम बता दो कोई, कौन गली गए श्याम वो छलिया निकले हरजाई, जिन संग हमने प्रीत … Continue reading

१९५९ – मधु – काहे बनो जी अनजान जादू डारके | 1959 – Madhu – kahe bano ji anjan jadoo daarke

काहे बनो जी अनजान, जादू डारके जागूँ मैं सारी-सारी रात, जिया हारके काहे बनो जी अनजान, जादू डारके कोई तो बताए मोहे, किसका क़सूर है अँखियाँ दीवानी, मेरा दिल मजबूर है कैसे सहूँ मैं ये सलोने दुख प्यार के काहे बनो जी अनजान … सपनों में आके मिले नए-नए भेस में नदिया-किनारे कभी तारों के … Continue reading

१९५८ – मधुमती – हम हाल-ए-दिल सुनाएँगे | 1958 – Madhumati – hum haal-e-dil sunayenge

तुम्हारा दिल मेरे दिल के बराबर हो नहीं सकता वो शीशा हो नहीं सकता, ये पत्थर हो नहीं सकता हम हाल-ए-दिल सुनाएँगे, सुनिए कि न सुनिए सौ बार इसे दोहराएँगे, सुनिए कि न सुनिए हम हाल-ए-दिल सुनाएँगे रहेगा इश्क़ तेरा ख़ाक में मिलाके मुझे हुए हैं इब्तिदा में रंज इंतेहा के मुझे हम हाल-ए-दिल सुनाएँगे … Continue reading

१९५८ – मधुमती – सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं | 1958 – Madhumati – suhana safar aur ye mausam haseen

सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं हमें डर है हम खो न जाएँ कहीं सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं ये कौन हँसता है फूलों में छुपकर बहार बेचैन है किसकी धुन पर कहीं गुनगुन, कहीं रुनझुन, कि जैसे नाचे ज़मीं सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं … ये गोरी नदियों का चलना उछलकर कि … Continue reading

१९६० – मासूम – नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए | 1960 – Maasoom – nani teri morni ko mor le gaye

नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए बाक़ी जो बचा था, काले चोर ले गए खाके-पीके मोटे होके चोर बैठे रेल में चोरोंवाला डब्बा कटके पहुँचा सीधा जेल में नानी तेरी मोरनी को … उन चोरों की ख़ूब ख़बर ली मोटे थानेदार ने मोरों को भी ख़ूब नचाया जंगल की सरकार ने नानी तेरी मोरनी … Continue reading

१९६७ – लाट साहब – सवेरेवाली गाड़ी से चले जाएँगे | 1967 – Laat Saheb – sawerewali gadi se chale jayenge

सवेरेवाली गाड़ी से चले जाएँगे, सवेरेवाली गाड़ी से चले जाएँगे कुछ लेके जाएँगे हो कुछ देके जाएँगे सवेरेवाली गाड़ी से चले जाएँगे ये मेला दो घड़ी का, दो दिनों की है बहार समय की बहती धार कहती जाती है पुकार मेहमान कब रुके हैं कैसे रोके जाएँगे कुछ लेके जाएँगे हो कुछ देके जाएँगे सवेरेवाली … Continue reading

१९५९ – लव मैरिज – क़रीब आओ न तड़पाओ | 1959 – Love Marriage – qareeb aao na tadpao

क़रीब आओ, न तड़पाओ हमें कहना है कुछ तुमसे, तुम्हारे कानों में क़रीब आओ ग़म-ए-फ़ुर्क़त से हमें फ़ुर्सत है, मेरी क़िस्मत है कि आए तुम कुछ भी न लाए तो भी क्या ग़म है, यही क्या कम है कि आए तुम क़रीब आओ … झूमेगा ज़माना मेरी छम-छम पे, आज मौसम पे जवानी है तेरी … Continue reading