मिट्टी से खेलते हो बार-बार किसलिए टूटे हुए खिलौनों से प्यार किसलिए मिट्टी से खेलते हो बार-बार किसलिए बनाके ज़िंदगानियाँ बिगाड़ने से क्या मिला मेरी उम्मीद का जहाँ उजाड़ने से क्या मिला आई थी दो दिनों की ये बहार किसलिए मिट्टी से खेलते हो बार-बार किसलिए ज़रा-सी धूल को हज़ार रूप नाम दे दिए ज़रा-सी … Continue reading
दो दिन की ज़िंदगी में दुखड़े हैं बेशुमार दुखड़े हैं बेशुमार है ज़िंदगी उसीकी जो हँस-हँसके दे गुज़ार हँस-हँसके दे गुज़ार उभरेंगे फिर सितारे, चमकेगा फिर से चाँद चमकेगा फिर से चाँद उजड़े हुए चमन में आएगी फिर बहार आएगी फिर बहार है ज़िंदगी उसीकी जो हँस-हँसके दे गुज़ार हँस-हँसके दे गुज़ार है धूप कहीं … Continue reading
झुम्मक-झुम्मक चल मेरे हाथी, चल मेरे हाथी दूल्हा बनके गुड्डा निकला, पीछे चलें बाराती झुम्मक-झुम्मक चल मेरे हाथी, चल मेरे हाथी जल्दी-जल्दी चल मेरे भाई, गुडिया का घर दूर है अपने संग एक बुड़्ढा बाबा चलने से मजबूर है गुडिया का घर दूर है, होय झुम्मक-झुम्मक चल मेरे हाथी … नीचे अपना दूल्हा राजा, ऊपर … Continue reading
साथी रे, साथी रे तुझबिन जिया उदास रे, ये कैसी अनबुझ प्यास रे आजा, आ आ, आ आ, आ आ दोनों जहाँ से दूर यहाँ मैं भटक रही हूँ जाने कहाँ मैं साथी रे … ना मैं काया ना मैं छाया फिर क्यूँ डोले मन भरमाया साथी रे … प्यार की मैं अनबूझ कहानी कुछ … Continue reading
दिन सुहाने, ये मौसम बहार का दिल ये चाहे, मैं गाऊँ गीत प्यार का दिन सुहाने, ये मौसम बहार का ये धड़कन, ये मस्ती, ये हलचल ये जवानी पे ख़ुशियों का आँचल कहना क्या ज़िंदगी के सिंगार का मौसम बहार का दिन सुहाने, ये मौसम बहार का जी ये चाहे कि अपना हो कोई नींद … Continue reading
अर्ज़ी हमारी, ये मर्ज़ी हमारी जो सोचे बिना ठुकराओगे, देखो बड़े पछताओगे दिल ही हमारा बचा न बेचारा, तो किस पे ये तीर चलाओगे देखे हैं तुम्हारे सपने, सोची हैं तुम्हारी बातें देखा है वो चँदा जबसे, आँखों में गुज़ारी रातें रुनझुन मन में धूम मचाके, हौले-हौले आके ये आग लगाके जो और कहीं चले … Continue reading
अरे भाई निकल के आ घर से आ घर से दुनिया की रौनक देख फिर से देख ले फिर से अरे भाई निकल के आ घर से केम ऊंघे छे भाई घनशामजी हो केम ऊंघे छे भाई घनशामजी दुनिया बदल गई प्यारे आगे निकल गई प्यारे अँधे कुँए में छुपके क्यूँ बैठा हुआ है मन … Continue reading
गोरी तेरे सपनों के सजना आए तेरे अंगना कर ले सोलह सिंगार हो जा जाने को अब तैयार लेके डोली खड़े हैं कहार कल से बालम के रंग रंग जाएगी तू उनके मन के महल को सजाएगी तू बीते जो दिन भूल जाना सखी भूल जाना वो बचपन का प्यार लेके डोली खड़े हैं कहार … Continue reading
मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए अफ़्सोस है कि आप भी मुश्किल में आ गए मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए दिल के कहने पे बढ़ते गए ये क़दम क्या ख़बर थी डगर भूल जाएँगे हम जाते थे कहीं और कहीं और आ गए मिलते-ही नज़र … नैन जादूभरे मुस्कुराते गए … Continue reading
नख़रेवाली देखने में देख लो हैं कैसी भोली-भाली अजनबी ये छोरियाँ, दिल पे डालें डोरियां मन की काली वो तो कोई और थी जो आँखों से समा गई दिल में बेरहम, बेवफ़ा, अपना कुछ अता-पता बता तो दे बेकली, बेकसी, कुछ तो कम हो फिर से मुस्कुरा तो दे वो तो कोई और थी जो … Continue reading