Songs of Shailendra::
archives

Amarendra R N

Amarendra R N has written 570 posts for शैलेंद्र के गीत | Songs of Shailendra

१९५३ – शिकस्त – कारे बदरा तू न ज न जा | 1953 – Shikast – kare badra tu na ja na ja

कारे बदरा तू न जा, न जा बैरी तू बिदेस न जा घननन मेघ-मल्हार सुना रिमझिम रस बरसा जा सनन-सनन हाय पवन झकोरा बुझती आग जलाए मन की बात नयन में आए, मुख से कही न जाए कारे बदरा तू न जा … माथे क सिंदूर रुलावे, लट नागिन बन जाए लाख रचाऊँ उन बिन … Continue reading →

१९५३ – शिकस्त – जब-जब फूल खिले | 1953 – Shikast – jab jab phool khile

जब-जब फूल खिले, तुझे याद किया हमने जब-जब फूल खिले देख अकेला हमें, हमें घेर लिया ग़म ने जब-जब फूल खिले मन को मैंने लाख मनाया पर अब तो है वो भी पराया ज़ख्म किए नासूर, तेरी याद के मरहम ने जब-जब फूल खिले मिलने के हैं लाख बहाने लेकिन मन का मीत न माने … Continue reading →

१९५३ – शिकस्त – नई ज़िंदगी से प्यार करके देख २ | 1953 – Shikast – nayi zindagi se pyar karke dekh 2

नई ज़िंदगी से प्यार करके देख इसके रूप का सिंगार करके देख इसपे जो भी है निसार करके देख नई ज़िंदगी से प्यार करके देख नींद से धरती को जो जगाएगा, ज़मीं को जो जगाएगा बीज आँसुओं के जो बिछाएगा, जो मेहनतें लुटाएगा फूल उसके आँगन में मुस्कुराएगा, मुस्कुराएगा और चार दिन गुज़ार करके देख … Continue reading →

१९५३ – शिकस्त – नई ज़िंदगी से प्यार करके देख १ | 1953 – Shikast – nayi zindagi se pyar karke dekh 1

नई ज़िंदगी से प्यार करके देख इसके रूप का सिंगार करके देख इसपे जो भी है निसार करके देख नई ज़िंदगी से प्यार करके देख सच कभी तो होंगे ख़्वाब और ख़याल, तेरे ख़्वाब और ख़याल कब तलक रहेंगे बेकसी के जाल, दिल पे बेकसी के जाल वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल, … Continue reading →

१९५३ – शिकस्त – सपनों की सुहानी दुनिया को | 1953 – Shikast – sapnon ki suhani duniya ko

सपनों की सुहानी दुनिया को आँखों में बसाना मुश्किल है अपनों पे जताना मुश्किल है, ग़ैरों से छुपाना मुश्किल है मेरा बचपन बीत गया है, दिल का लड़कपन बाक़ी है मैं अपने-आप को समझा लूँ, पर दिल को मनाना मुश्किल है अहसान तेरा कैसे भूलूँ, तेरे ग़म के सहारे ज़िंदा हूँ वरना इन जाती सांसों … Continue reading →

१९५२ – संस्कार – दो नैनों ने जाल बिछाया | 1952 – Sanskaar – do naino ne jaal bichhaya

दो नैनों ने जाल बिछाया, और दो नैना उलझ गए एक वही बेदर्द ना समझा, दुनियावाले समझ गए दिल था एक बचपन का साथी, वो भी मुझको छोड़ गया निपट अनाड़ी अनजाने से मेरा नाता जोड़ गया मैं बिरहन प्यासी की प्यासी, सावन आए बरस गाए बैठे हैं वो तन-मन घेरे, फिर-भी कितनी दूर हैं … Continue reading →

१९५२ – संस्कार – मोहब्बत के झूठे सहारों ने लूटा | 1952 – Sanskaar – mohabbat ke jhoothe saharon ne loota

मोहब्बत के झूठे सहारों ने लूटा चमन को चमन की बहारों ने लूटा चराग़ आँधियों में जलाएँ तो कैसे हमारी नज़र को नज़ारों ने लूटा वो झूटी क़सम वो वफ़ाओं के वादे हमें मंज़िलों के इशारों ने लूटा मुक़द्दर से कोई शिकायत करें क्या हमें जगमगाते सितारों ने लूटा mohabbat ke jhuuThe sahaaro.n ne luuTaa … Continue reading →

१९६१ – सपन सुहाने – चाँद कभी था बाँहों में | 1961 – Sapan Suhane – chand kabhi tha baanhon mein

चाँद कभी था बाँहों में, फूल बिछे थे राहों में अब तो वो सपने गए बिखर, डूब गए हम आहों में चाँद कभी था बाँहों में दूर-दूर-दूर जहाँ उठ रहा है अब धुँआ मेरा वहींपर था आशियाँ, तारों की झिलमिल छाँव में चाँद कभी था बाँहों में … हाय मेरी बेकसी, बेज़ुबाँ है ज़िंदगी मैं … Continue reading →

१९६१ – सपन सुहाने – नज़र से मिल गई नज़र | 1961 – Sapan Suhane – nazar se mil gayi nazar

नज़र से मिल गई नज़र, और पल में दिल तेरा हुआ फिर मैं क्या जानूँ क्या हुआ नज़र से लड़ गई नज़र, और घायल दिल मेरा हुआ फिर मुझसे पूछो क्या हुआ दिल सोचता है, चँदा दिन में कहाँ से आया कैसे नहीं आते हम, जब तुमने था बुलाया नज़र से मिल गई नज़र … … Continue reading →

१९६२ – संगीत सम्राट तानसेन – झूमती चली हवा याद आ गया कोई | 1962 – Sangeet Samrat Tansen – jhoomati chali hawa yaad aa gaya koi

झूमती चली हवा, याद आ गया कोई बुझती-बुझती आग को फिर जला गया कोई झूमती चली हवा खो गईं हैं मंज़िलें, मिट गए हैं रास्ते गर्दिशें ही गर्दिशें अब हैं मेरे वास्ते और ऐसे में मुझे, फिर बुला गया कोई झूमती चली हवा … एक हूक-सी उठी, मैं सिहरके रह गया दिल को अपने थामके, … Continue reading →